हफ्ते भर में कभी फुरसत ही नहीं मिलती कि आपसे कोई सीधी बात हो सके। तीन महीने बीत गए, चौथा बीतने जा रहा है। देखिए, एक बात तो तय मानिए कि हमारा रिश्ता लंबा होने जा रहा है। अर्थकाम को धीरे-धीरे ऐसा बना देना है कि वह हमारी-आपकी दुनिया की देखभाल में सक्षम हो जाए। मेरे एक अभिन्न मित्र ने शुरुआत के वक्त कहा कि चलिए आप अर्थ-काम देखिए, हम धर्म-मोक्ष संभाल लेते हैं। बात मुझे अचानकऔरऔर भी

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की बहुचर्चित जीवन आस्था पॉलिसी की परिपक्वता पर बीमाधारक को मिलनेवाले रिटर्न पर टैक्स देने को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है और इन पर एलआईसी या बीमा नियामक संस्था आईआरडीए नहीं, बल्कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ही कोई स्पष्ट राय पेश कर सकता है। एलआईसी के प्रवक्ता ने कहा कि इस एकल प्रीमियम पॉलिसी को आईआरडीए के साथ पूरे विचार विमर्श के बाद बनाया गया था। लेकिन पांच याऔरऔर भी