नोएल नहीं, उनके साले लेंगे रतन टाटा की जगह

टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा के उत्तराधिकारी का फैसला हो गया है। पहले कयास लगाया जा रहा था कि यह जिम्मा रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा को सौंपा जाएगा। नोएल और रतन टाटा के पिता नवल टाटा हैं, लेकिन उनकी माताएं भिन्न हैं। टाटा समूह ने तय किया है कि करीब 4.32 लाख करोड़ रुपए के कारोबार वाले समूह की बागडोर सायरस मिस्त्री को सौंपी जाएगी।

43 साल के सायरस मिस्त्री को अभी समूह का उप चेयरमैन बनाया गया है। अगले साल दिसंबर में रतन टाटा के रिटायर होने के बाद वे समूह के चेयरमैन बना दिए जाएंगे। सायरस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के सबसे बड़े निजी शेयरधारक पल्लोनजी मिस्त्री के बेटे हैं। उनकी बहन अलु मिस्त्री की शादी नोएल टाटा से हुई है। इस तरह वे रिश्ते मे नोएल के साले साहब हुए।

सायरस ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रखी है। फिलहाल कंस्ट्रक्शन के काम में लगे शापूरजी पल्लोनजी समूह के प्रबंध निदेशक हैं। वे साल 2006 से टाटा संस के निदेशक बोर्ड के सदस्य हैं। टाटा समूह की विरासत उन्हें मिलने पर एम्बिट कैपिटल के निदेशक एंड्रयू हॉलैंड का कहना है, “अच्छा है कि परिवार ने अंदर का कोई व्यक्ति चुना है। अगर कोई बाहरी व्यक्ति चुना जाता तो मुझे चिंता होती क्योंकि टाटा समूह की संस्कृति बड़ी मजबूत है।”

बता दें कि टाटा समूह ने अगस्त 2010 में रतन टाटा के उत्तराधिकारी के चयन के लिए पांच सदस्यीय दल बनाया था। सायरस मिस्त्री खुद भी इन पांच लोगों में शामिल थे। गौरतलब है कि रतन टाटा अविवाहित हैं। इसलिए उनकी कोई आद-औलाद नहीं है।

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