सुबेक्स में दिखता है शुभ लाभ

सुबेक्स लिमिटेड का शेयर 1 अक्टूबर को 52.25 रुपए पर बंद हुआ, 1 नवंबर को 74.40 रुपए पर बंद हुआ और कल 30 नवंबर को भी इसका बंद भाव बीएसई में 74.05 रुपए रहा है। इस तरह एक महीने में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हासिल करने के बाद यह पिछले एक महीने से ठहरा हुआ है। हालांकि इस दौरान यह ऊपर में 94.90 रुपए और नीचे में 66 रुपए तक जा चुका है। इस समय इसमें लंबे समय के लिए अच्छी खरीद बनती है। इसकी दो वजहें हैं। एक, इसका ठीक पिछले बारह महीने का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 17.85 रुपए और इसलिए इसके शेयर का पी/ई अनुपात मात्र 4.15 है। दो, इसकी बुक वैल्यू 65.64 रुपए है।

कल बीएसई में इसके 13.29 लाख और एनएसई में 20.40 लाख शेयरों का कारोबार हुआ है। बीएसई में डिलीवरी वाले शेयरों का अनुपात 16.19 फीसदी और एनएसई में 18.22 फीसदी था। इससे पता चलता है कि इसे मथनेवाले डे-ट्रेडर काफी सक्रिय हैं। उनके मथने से निकलनेवाले मक्खन का फायदा आम निवेशकों को उठा लेना चाहिए क्योंकि जानकारों की मानें तो यह शेयर तीन-चार महीने में 110 रुपए तक जा सकता है। कल भी इस शेयर में करीब 5 फीसदी बढ़त दर्ज की गई है।

सुबेक्स 1992 में बनी बैंगलोर आधारित आईटी सॉफ्टवेयर उद्योग की कंपनी है। जरूरत भांपकर सॉफ्टवेयर बनाना उसकी खूबी है। कल ही यूरोप के टेलिकॉम ऑपरेटरों को उसने ऐसा सॉफ्टवेयर बेचा है जो उपभोक्ता को भारी बिल के आकस्मिक झटके से बचाता है। दुनिया के 72 सबसे बड़े टेलिकॉम ऑपरेटरों में से 36 को सुबेक्स अपना ग्राहक बना चुकी है। अभी 70 देशों में उसकी किसी न किसी रूप में मौजूदगी है।

कंपना का आईपीओ जुलाई 1999 में आया था, जिसमें 10 रुपए अंकित मूल्य के शेयर 65 रुपए प्रीमियम (इश्यू मूल्य 75 रुपए) में जारी किए गए थे। इसके कंपनी जून 2000 और जनवरी 2006 में दो बार एक पर एक का बोनस दे चुकी है। इस तरह जिसको इसके आईपीओ में शेयर मिले होंगे, उसके निवेश की कीमत अब तक तीन गुनी हो चुकी होगी। कंपनी अक्सर लाभांश भी देती रही है।

कंपनी ने समेकित आधर पर सितंबर 2010 की तिमाही में 124.76 करोड़ रुपए की आय पर 30.72 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है जबकि सितंबर 2009 की तिमाही में उसे 116.81 करोड़ रुपए की आय पर 3.20 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। इस तरह सच कहें तो कंपनी ने बडी छलांग लगाई है। बीते वित्त वर्ष 2009-10 में उसकी आय 474.78 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 100.30 करोड़ रुपए रहा है।

कंपनी की कुल इक्विटी अभी 65.18 करोड़ रुपए है जिसका 12.43 हिस्सा प्रवर्तकों के पास है, जबकि एफआईआई के पास उसके 12 फीसदी और डीआईआई के 4.5 फीसदी शेयर हैं। असल में कंपनी ने जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटीर रसीट्स) भी जारी कर रखी हैं, जिससे उसकी इक्विटी संरचना काफी जटिल हो गई है। खैर, जो भी हो, यह कंपनी इस समय निवेश के लिए काफी मुफीद है और इसमें अच्छा रिटर्न मिल सकता है। लेकिन निवेश दो-तीन साल का तो होना ही चाहिए।

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