निफ्टी के 100 अंक गिरने का अंदेशा

हां, सुबह-सुबह निफ्टी के वापस 5170 के करीब आ जाने के बाद थोड़ा करेक्शन तो होना ही था। निफ्टी बंद हुआ है कल से 6.95 अंकों की मामूली गिरावट के साथ 5133.25 पर। अब 5000 को नया धरातल मानकर चलें जहां से बाजार खुद को जमाने के बाद ऊपर की ओर कूच करेगा। वैसे, कितनी अजीब बात है कि जब बाजार बढ़ रहा है तो ट्रेडर व निवेशक सेटलमेंट की खतरनाक फांस को एकदम भूल ही गए हैं। लेकिन डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कॉल व पुट ऑप्शंस की पोजिशन के हिसाब से रोलओवर की तकलीफ का कम-ज्यादा होना तय होगा। कल 30 लाख से ज्यादा पुट बढ़ गए जिससे पक्का आभास मिलता है कि निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट आ सकती है।

वैसे, अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का आज रात आ रहा फैसला डाउ जोंस में 200 अंकों के आसपास की गिरावट का सबब बन सकता है। इससे भारत समेत पूरे एशिया के बाजार हफ्ते के बाकी बचे दो कारोबारी दिनों में कमजोर रह सकते हैं।

इस समय सारे टेक्निकल एनालिस्ट खरीदने की सलाह दे रहे हैं। इसलिए मेरा मानना है कि हमें अगले चार सत्रों तक खरीद या लांग सौदों को लेकर काफी सावधान रहना चाहिए। ऐसी बिना बात की खोखली तेजी (suckers rally) ट्रेडिंग में थोड़ा फायदा कराती है। लेकिन बाजार के गिरने पर उससे कहीं ज्यादा खींचकर निकाल लेती है। यह वाकई आप पर निर्भर करता है कि इन चार दिनों में आप ट्रेडिंग करना चाहते हैं या नहीं।

हम सही मौके का फायदा उठाने के अपने नजरिये पर कायम रहेंगे और जब-जब बाजार गिरेगा, खरीदते रहेंगे। इस बीच एचसीएल टेक्नो में तेज हलचल दिख सकती है क्योंकि उसे बड़ा ऑर्डर मिलने की चर्चा है। यह अभी 405.55 रुपए पर है। बीईएमएल आज 2.65 फीसदी बढ़कर 492.15 रुपए पर पहुंच गया। कंपनी को मिल रहे नए ऑर्डर की घोषणा अभी नहीं हुई। खबर आने के बाद यह स्टॉक चमक सकता है। वोकहार्ट के प्रवर्तक कंपनी की हिस्सेदारी बेच सकते है जिससे स्टॉक में फिर से सक्रियता बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक सिम्फनी लिमिटेड को मारुति के साथ-साथ वॉलमार्ट से भी ऑर्डर मिल रहे हैं जिनकी सूचना अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। घोषणा होने के बाद यह शेयर उठल सकता है। फिलहाल 1382.20 रुपए चल रहा है।

अल्फा लवल के चेयरमैन ने 28 अप्रैल को ही कंपनी की एजीएम (सालाना आमसभा) में बयान दे दिया था कि वे अगले साल एजीएम नहीं कर सकते हैं। अब निदेशक बोर्ड ने दो दिन पहले बाकायदा कंपनी को डीलिस्ट कराने का फैसला कर लिया। इन चर्चाओं के बीच यह शेयर पिछले एक महीने में 1500 रुपए से 50 फीसदी बढ़कर 2250 रुपए पर पहुंच चुका है। खैर, कंपनी में पब्लिक की होल्डिंग कम से कम 25 फीसदी करने की अंतिम तारीख मार्च 2012 है। अल्फा लवल में पब्लिक के पास केवल 11.23 फीसदी शेयर हैं, जबकि स्वीडन की प्रवर्तक कंपनी के पास 88.77 फीसदी शेयर हैं। इसलिए वर्तमान प्रबंधन के अगले साल एजीएम करने का सवाल ही कहां उठता है!!! वैसे भी, इस तरह की ज्यादातर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को डीलिस्टिंग के लिए बायबैक की घोषणा करनी ही पड़ेगी।

भरसक प्रयास किया, अच्छी बात है। लेकिन कामयाब नहीं हुए तो यह तो सोचिए कि क्या आपने मौके व हालात की मांग के हिसाब से सही प्रयास किया था?

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का पेड-कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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