श्रम बाज़ार में बढ़ा ग्रेजुएट्स का आना

अच्छी बात यह है कि अपने यहां ग्रेजुएट युवक-युवतियां थक-हारकर घर बैठ जाने के बजाय नौकरी मांगने के लिए श्रम बाज़ार में पहले से ज्यादा उतरने लगे हैं। हालांकि आमतौर पर काम मांगनेवाले श्रमिकों का श्रम बाज़ार में आना घटा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में श्रम भागीदारी की दर (एलपीआर) वित्त वर्ष 2016-17 में 46.2% हुआ करती है। यह बीते वित्त वर्ष 2022-23 में घटकर 39.5% पर आ गई है। लेकिन बेरोज़गारी की ऊंची दर के बावजूद ग्रेजुएट्स की श्रम भागीदारी दर बढ़ रही है। कोविड-19 के प्रकोप से पहले सितंबर-दिसंबर 2019 में यह दर 61.5% थी। महामारी की मार से घटकर यह सितंबर-दिसंबर 2020 में 56.7% पर आ गई। मगर उसके बाद बढ़ते-बढ़ते सितंबर-दिसंबर 2022 के दौरान यह दर 62.5% पर पहुंच गई। यह रुझान एक शुभ संकेत है क्योंकि इससे हमारे श्रम बाज़ार की संरचना बदल सकती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…

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