जिंदल सॉ में निवेश है फलदायी

जिंदल सॉ बीएसई के ए ग्रुप और बीएई-200 सूचकांक में शामिल है। इसलिए कैश सेगमेंट के साथ ही उसमें डेरिवेटिव सौदे (फ्यूचर एंड ऑप्शन) भी होते हैं। उसके अक्टूबर सीरीज के फ्यूचर्स में वोल्यूम एक करोड़ शेयरों के पार जा चुका है, जबकि नवंबर सीरीज के फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट एक ही सत्र में 103 फीसदी बढ़ गया है। इससे साफ पता चलता है कि इस स्टॉक में बड़े लोग घुस रहे हैं। शुक्रवार को कंपनी का शेयर बीएसई (कोड – 500378) में 4.30 फीसदी बढ़कर 226.80 रुपए और एनएसई (कोड – JINDALSAW) में 4.60 फीसदी बढ़कर 227.45 रुपए पर बंद हुआ है। सूत्रों के अनुसार कंपनी के निदेशक बोर्ड की बैठक 7 नवंबर को होनेवाली है जिसमें उसकी सौ फीसदी सब्सिडियरी जिंदल आईटीएफ की लिस्टिंग पर विचार किया जाएगा।

जिंदल सॉ इस समय तीन क्षेत्रों – इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन और फैब्रिकेशन में सक्रिय है। उसकी सब्सिडियरी जिंदल आईटीएफ की चार सब्सिडियरियां हैं – जिंदल वॉटर इंफ्रा, जिंदल वॉटरवेज, जिंदल अरबन इंफ्रा और जिंदल रेल इंफ्रा। 31 मार्च 2010 को खत्म 15 महीनों में जिंदल आईटीएफ की आय 236 करोड़ रुपए रही है। सूत्रों का यह भी कहना है कि इनमें से जिंदल रेल इंफ्रा का पी/ई अनुपात टीटागढ़ वैगन्स जैसे अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी कम है। साथ ही जिंदल रेल इंफ्रा के पास 90 एकड़ जमीन है जिसमें मालिकाने का कोई कानूनी पचड़ा या विवाद नहीं है। वह गुजरात के करजन में रेल वैगन बनाने की एक परियोजना लगा रही है जिसकी अनुमानित लागत 150 करोड़ रुपए है। इसमें दिसंबर 2010 से उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद है।

जिंदल वॉटर इंफ्रा पानी के शोधन और पेय जल की उपलब्धता के काम से जुड़ी है। वह 315 करोड़ की पानी की परियोजना को पूरा करने की कगार पर है। उत्तराखंड के सितारगंज शहर में 20 करोड़ की परियोजना पर काम कर रही है। साथ ही उसे उड़ीसा के अंगुल में 240 करोड़ का काम मिला है। ऐसे ही अनुबंध उसे गुजरात के राजकोट व भावनगर और छत्तीसगढ़ के नया रायपुर में मिले हैं। जिंदल ईटीएफ की अऩ्य सब्सिडियरी जिंदल वॉटरवेज ने 2007-08 में कामकाज शुरू किया था। उसके पास अभी सात जलयान और एक बार्ज है। कंपनी लॉजिस्टिक्स और कार्गो मूवमेंट के काम में लगी है। जिंदल अरबन इंफ्रा दिल्ली में महानगरपालिका से निकलनेवाले ठोस कचरे से बिजली बनाने की परियोजना पर काम कर रही है। इसकी क्षमता 20 मेगावॉट होगी।

जिंदल सॉ की सब्सिडियरी की इन चारों सब्सडियरियों का मूल्यांकन और उनके मूल्य को अनलॉक करने का मसला काफी जटिल है। इसे या तो कंपनी या उसका मर्चेंट बैंकर कर सकता है। लेकिन इतना तय है कि जिंदल सॉ का शेयर आठ-दस महीने में ही काफी बढ़ सकता है। हाल-फिलहाल इसमें कम से कम 30 फीसदी बढ़त की संभावना है। अभी यह शेयर 227 रुपए के आसपास चल रहा है। इसकी बुक वैल्यू 134 रुपए है। 2009-10 में कंपनी की समेकित आय 7300 करोड़ और शुद्ध लाभ 675 करोड़ रुपए रहा है। दो साल बाद उसकी आय के 10,000 करोड़ और शुद्ध लाभ के 1000 करोड़ रुपए हो जाने का अनुमान है। इस समय कंपनी के पास 800 करोड़ रुपए का कैश बैलेंस है और उसने 325 करोड़ रुपए का निवेश कर रखा है।

कंपनी की इक्विटी 55.25 करोड़ रुपए है। इसमें प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 46 फीसदी है जिसमें से 34.55 फीसदी भारतीय और 11.45 फीसदी विदेशी है। एफआईआई के पास उसके 21.36 फीसदी और डीआईआई के पास 11.63 फीसदी शेयर हैं। पिछली चार तिमाहियों की शेयरधारिता को देखने से पता चलता है कि इसमें कोई बड़ी बिकवाली नहीं हुई है। हां, एलआईसी ने पिछली दो तिमाहियों में कंपनी के 32 लाख शेयर जरूर खरीदे हैं। हमारा मानना है कि जिंदल सॉ में किया गया निवेश लंबे समय से लेकर छोटे समय के निवेशकों के लिए भी फलदायी होगा।

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