जनवरी में एफडीआई में आई 48% की भारी कमी

विकसित देशों, खासकर यूरोपीय देशों की आर्थिक स्थिति में सुधार धीमा रहने से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) इस साल जनवरी में एक साल पहले की तुलना में 48 फीसदी गिर कर मात्र 1.04 अरब डॉलर रह गया। भारत में एफडीआई निवेश के मामले में मॉरीशस, सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, जापान, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात प्रमुख स्रोत हैं। जनवरी, 2010 में विदेशी कंपनियों ने भारत ने 2.04 अरब डॉलर का सीधा पूंजी निवेश (एफडीआई) किया था।

एक सरकारी अधिकारी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया कि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल 2010 से जनवरी 2011 तक के पहले 10 महीनों में एफडीआई साल भर पहले की इसी अवधि की तुलना में 25 फीसदी घटकर 17 अरब डालर पर आ गया है। बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में देश ने 22.9 अरब डॉलर एफडीआई आकर्षित किया था।

अधिकारी ने बताया कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हम पिछले वित्त वर्ष का एफडीआई स्तर हासिल करने की स्थिति में नहीं होंगे। यह बड़ी चिंता का एक कारण है। वित्त वर्ष 2009-10 में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घटकर 25.88 अरब डॉलर पर आ गया था जो इससे पूर्व वित्त वर्ष में 27.33 अरब डॉलर था।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी के जोशी ने कहा, ‘‘ये आंकड़े काफी खराब हैं। इस रुख को देखते हुए ऐसा लगता है कि भारत को 2010-11 में कम एफडीआई हासिल होगा। वैश्विक आर्थिक सुधार की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है।’’

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