हर तरफ से चेतावनी। किसी को ठीक-ठीक नहीं पता कि क्या होनेवाला है। बस इतना कि सुपर अल-नीनो आ रहा है या कमोबेश आ चुका है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस कह चुके हैं, “दुनिया को इसे अर्जेंट जलवायु चेतावनी के रूप में लेना चाहिए। अल-नीनो की स्थितियां गरम होती दुनिया की आग में घी डालने का काम करेंगी।” भारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसून में सामान्य से 13% कम बारिश हुई है। शुरुआती अनुमान दीर्घकालिक औसत से 10% कम बारिश का ही था। हम भारतीय अमूमन ज्यादा गरमी या कमज़ोर बारिश को कंधे झटक कर टाल देने के आदी हैं। मौसम मारक है, मानसून अनिश्चित है। लेकिन जीवन तो चलते रहना चाहिए। औपचारिक अर्थव्यवस्था या संगठित कॉरपोरेट व सरकारी क्षेत्र पर हो सकता है कि खास असर न पड़े। लेकिन अल-नीनो से जो अप्रत्याशित गरमी, पानी की कमी, फसलों की बरबादी और ऊंची खाद्य महंगाई सिर उठाएगी, उससे अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर निर्भर देश की 88% आबादी की हालत खस्ता हो सकती है। 150 साल पहले 1876-78 के दौरान ब्रिटिश शासन में भारत को लम्बे समय तक मानसून के चौपट होने से भीषण अकाल का सामना करना पड़ा था। इसमें 55 लाख से 82 लाख लोग मारे गए थे। कही इस बार का सुपर अल-नीनो वैसी ही त्रासदी ले आया तो! अब शुक्रवार का अभ्यास…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
