शेयरों में निवेश कोई सीधा-सीधा अंकगणित नहीं, जहां जोड़ने-घटाने और गुणा-भाग से काम चल जाए। यह प्रोबैबिलिटी या प्रायिकता का खेल है। यहां कोई निश्चितता नहीं। लगातार अनिश्चितता की भंवर। यहां एफडी या बॉन्ड बाज़ार जैसा पहले से निर्धारित रिटर्न नहीं मिलता। कभी-कभी महीने भर में ही 40-50% रिटर्न मिल सकता है तो कभी सालों-साल तक शेयर ठहरा पड़ा रहता है और अच्छी-खासी कंपनियों तक में आपका निवेश साल-दर-साल घटता चला जाता है। धारणा है कि अपना शेयर बाज़ार लम्बे समय में 14-15% की सालाना चक्रवृद्धि दर से रिटर्न देता रहा है। मसलन, हर्षद मेहता के घोटाले के उजागर होने का बाद सेंसेक्स 24 दिसंबर 1992 को 2615.37 पर बंद हुआ था। अभी 30 अक्टूबर 2026 को 74,459.53 पर बंद हुआ है। इन करीब 24 सालों में सेंसेक्स का सालाना रिटर्न 14.97% निकलता है। लेकिन आज 24-25 साल कौन इंतज़ार करता है? अब लम्बा निवेश दस साल से ज्यादा नहीं रह गया है। हम 30 अक्टूबर 2016 से तुलना करें तो सेंसेक्स का सालाना रिटर्न 11.15% ही रह जाता है। वहीं, पांच साल की अवधि का हिसाब लगाएं तो सालाना रिटर्न मात्र 4.61% निकलता है। बैंक एफडी से भी कम। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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