सरकार का दावा, परमाणु संयंत्रों से खतरा नहीं

एक तरफ दुनिया भर में परमाणु बिजली संयंत्रों से तौबा की जा रही है, इसके विकिरण से होनोवाली घातक बीमारियों के बारे में सचेत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत में परमाणु बिजली संयंत्र के विरोध को शांत करने के लिए लोगों को अचेत किया जा रहा है। केंद्र सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग ने दावा किया है कि परमाणु बिजली घरों में काम करने वाले लोगों को कोई बीमारी, खासतौर से कैंसर होने का खतरा अन्‍य लोगों के मुकाबले ज्‍यादा नहीं होता।

मी‍डिया से बात करते हुए टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक, डॉ. के एम मोहनदास ने कहा कि यह गलतफहमी दूर करना जरूरी है। एक अध्‍ययन का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि परमाणु बिजली घरों या उनके आसपास काम करनेवाले लोगों को विकिरण से होनेवाले रोगों और खासतौर पर कैंसर होने का डर ज्‍यादा नहीं होता। इस अध्‍ययन में परमाणु बिजली घरों के पास 15 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को शामिल किया गया था। यह अध्‍ययन भारत के परमाणु बिजली निगम लिमिटेड ने 1995 से 2010 की अवधि के लिए करवाया।
राष्‍ट्रीय परमाणु बिजली निगम के निदेशक एस ए भारद्वाज ने भी स्‍पष्‍ट किया कि प्रकृति में हर जगह कैंसर के तत्‍व पाए जाते हैं। ये तत्‍व हमारे घरों में, पेयजल और खाने-पीने की चीजों तक में मौजूद रहते है। एक और बात नोट करने लायक है कि पोटेशियम-40, रेडियम-226 और रेडियम-228 जैसे रेडियोएक्टिव तत्‍व प्राकृतिक रूप से मानव शरीर में भी पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर का भारतीय पर्यावरण विकिरण मॉनिटरिंग नेटवर्क देश भर में विकिरण की माप-जोख करता है। इसमें परमाणु बिजली संयंत्रो के आसपास के इलाके भी शामिल हैं।

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