हर देशवासी को जानना ही चाहिए कि देश चला रही मौजूदा भारत सरकार आय-व्यय को लेकर क्या कर रही है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 का कुल बजट ₹53.47 लाख करोड़ का है। इसमें से टैक्स व अन्य मदों से उसे कुल ₹35.33 लाख करोड़ का राजस्व मिलेगा। ₹80,000 करोड़ वो आस्तियां बेचकर जुटाएगी। ₹38,397 करोड पुराने ऋणों की वसूली से मिलने हैं। इस तरह उसकी कुल आय ₹36.51 लाख करोड होगी। बाकी ₹16.96 लाख करोड़ रुपए वो उधार से जुटा रही है। मतलब सरकार अपनी कुल आय से 46.45% अधिक खर्च ऋण लेकर करेगी। उसने खर्च घटाने से तौबा कर ली है। केंद्र सरकार पर चढ़ा कुल ऋण ₹214.82 लाख करोड़ पर पहुंचने जा रहा है। देश में 29.6 करोड़ परिवार हैं तो हर परिवार पर भारत सरकार के ऋण का ₹7.26 लाख का बोझ। सरकार इस साल ब्याज अदायगी पर ₹14.04 लाख करोड़ खर्च करेगी। यह उसकी कुल आय का 38.46% है। इसके ऊपर से उसे इस साल ऋण के मूलधन में से ₹6.22 लाख करोड लौटाने हैं। इसे जोड़ दें तो ऋण के मूलधन व ब्याज पर सरकार को इस साल ₹20.24 लाख करोड़ चुकाने हैं। इस तरह सरकार के खजाने में आ रही कुल आय का 55.44% हिस्सा नए-पुराने ऋणों की सेवा में चला जाएगा। राज्यों के ऋण अलग हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राएं बदस्तूर जारी हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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