क्या भारत की विकासगाथा इतनी भुरभुरी, कमज़ोर बुनियाद और कच्ची दीवार पर खड़ी है कि भ्रष्टाचार का सच उजागर करने से खतरे में पड़ जाएगी और जो भी इस मुद्दे को उठाने की कोशिश करेगा, उसे गद्दार व देशद्रोही करार दिया जाएगा? ऐसा होना तो नहीं चाहिए। लेकिन देश में इस वक्त यही हो रहा है। भरी संसद में भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस सांसद और नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी को देशद्रोही करार दिया। वहीं, संसदऔरऔर भी

शेयर बाज़ार तो चक्रों में चलता है। लेकिन हमें निवेश की अपनी सोच व रणनीति को हमेशा संतुलित रखना होता है। भावना में बहकर लिए गए फैसले निवेश की सफलता के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं। भीड़ की भेड़चाल में नहीं फंसना है। न कभी लालच में आकर निवेश करना है, न ही डरकर अफरातफरी में बेचकर निकल जाना है। निवेश से रिटर्न कमाने के तीन मुख्य रास्ते हैं। एक, उधार देकर उस पर ब्याज कमाना। देशऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में नियमन के नाम पर किसी भी विचार को दबाना बाज़ार के विकास को कुंठित करना है। ऐसा करने पर बाजार मूल्य-खोज की भूमिका ही नहीं निभा सकता। यहां तो हज़ारों विचारों को खुलकर टकराने देना चाहिए। नहीं तो बाज़ार का आधार व्यापक नहीं, बल्कि मुठ्ठी भर ऑपरेटरों के हाथ में सिमटकर रह जाएगा। आज भारतीय शेयर बाज़ार की हालत कमोबेश ऐसी ही है। अब इसके ऊपर सेबी डिजिटल प्लेटफॉर्म को मान्यता देने के नामऔरऔर भी

पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी ने करीब डेढ़ महीने पहले 22 अक्टूबर को शेयर बाज़ार पर लिखने या बोलने वाले तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म को कंट्रोल करने के लिए जो मशविरा पत्र जारी किया है, उस पर वो अंततः सर्कुलर जारी करके अपना अंकुश कस देगी। पब्लिक से सलाह लेने की बात तो महज खानापूरी होती है। यह कंट्रोल उन लोगों के लिए है जो अभी तक सेबी के नियामक दायरे से बाहर हैं। बाकी जो भी पूंजीऔरऔर भी

देश की पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी की ज़िम्मेदारी है कि वो करोड़ों मासूम निवेशकों की हिफाजत करे। सुनिश्चित करे कि बाज़ार में पहले से लिस्टेड और आईपीओ लाने वाली नई कंपनियां सारी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराएं। लेकिन यहां तो स्थिति यह है कि खुद सेबी की चेयरपरसन माधबी पुरी बुच ने अडाणी की ऑफशोर कंपनियों में अपने निवेश की बात छिपाई है। उन पर पूंजी बाज़ार के नियमों की अवहेलना करने और पद कीऔरऔर भी