सरकार का खज़ाना टैक्स से लबालब भरा है और भरता ही जा रहा है। ऊपर से वो जितना चाहे, देश के नाम पर बाज़ार से ऋण उठा सकती है, जिसे वो नहीं, आनेवाली पीढ़ियां चुकाएंगी। इस बीच शेयर बाज़ार बम-बम करता जा रहा है तो सरकार निश्चिंत भाव से अपने मित्रों के लिए पुराने मंत्रियों के दम पर पुरानी नीतियां ही चलाए जा रही है। देश के 81.35 करोड़ गरीब महीने का मुफ्त पांच किलो अनाज पाकरऔरऔर भी

एक काम, जिसमें इस सरकार का कोई जोड़ नहीं, जिसमें उसने रिकॉर्ड बना दिया है, वो है टैक्स वसूली। इतना बेहताशा टैक्स आज तक आजाद भारत की किसी सरकार ने नहीं वसूला। पिछले कई सालों से व्यक्तिगत इनकम टैक्स से वसूली जा रही रकम कॉरपोरेट टैक्स से ज्यादा चल रही है। बीते वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स से ₹9,11,055 करोड़ हासिल किए, जबकि इनकम टैक्स से वसूली गई रकम ₹10,44,726 करोड़ रही। इससे सालऔरऔर भी

शेयर बाज़ार का निवेश उनके लिए नहीं जो तुरत-फुरत कुछ पाना चाहते हैं। निवेश के लिए लम्बे समय की सोच की दरकार है। उसी से मन की शांति और धन की समृद्धि मिलती है। जो शेयर बाज़ार से फटाफट कुछ पाना चाहते हैं, उनके लिए एकाध दिन से लेकर एक-दो महीने की ट्रेडिंग का रास्ता है। लेकिन उन्हें ट्रेडिंग की बेचैनी व तनाव के ऊपर धन डूबने का रिस्क भी उठाने को तैयार रहना चाहिए। ट्रेडिंग सेऔरऔर भी

देश जिसे सुनते-सुनते पक गया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार फिर लालकिले की प्राचीर वही विकसित भारत का राग अलापा। एक बात नई थी कि उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए हर किसी की राय ली जा रही है। लेकिन जो-जो राय उन्होंने गिनाई, उनमें कहीं से भी यह राय नहीं थी कि विकसित भारत के लिए करोड़ों बेरोज़गारों को अच्छा-खासा काम देने की ज़रूरत है। उसमें यह भी नहीं था कि करोड़ों किसानोंऔरऔर भी