शेयर बाज़ार दिन, महीने, साल हमेशा लहरों में चलता है। बाज़ार में ऐसा दौर होता है जब बहुत सारे शेयर आकर्षक भावों पर मिल रहे होते हैं। वहीं, ऐसा भी दौर होता है जब बहुत सारे शेयर काफी महंगे भाव पर चल रहे होते हैं। जो निवेशक बाज़ार की लहर के निचले स्तर या शेयरों को आकर्षक भाव पर खरीदते हैं, वे अक्सर दो-तीन साल में अच्छा कमा लेते हैं। वहीं, जो निवेशक बाज़ार की लहर केऔरऔर भी

सरकारी दावों पर यकीन करें तो देश में अब कोई बेहद गरीब नहीं बचा और स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन स्तर जैसे तमाम पहलुओं को मिलाकर देखें तो बहुआयामी गरीब लोगों का आबादी में हिस्सा 2015-18 से 2019-21 के बीच 24.85% से घटकर 14.96% पर आ चुका है। लेकिन देश की लगभग 60% आबादी या 80 करोड़ गरीबों को पांच किलो राशन मुफ्त देने की कोरोनाकाल में साल 2020 में शुरू की गई योजना पांच साल और बढ़ाऔरऔर भी

मोदी सरकार को दो काम बखूबी आते हैं। एक मीडिया व हेडलाइंस को मैनेज करते हुए जमकर हल्ला मचाना और दूसरा टैक्स बढ़ाना। उसने इन दोनों ही कामों को अभीष्टतम स्तर तक पहुंचा दिया है। बहुत सारा अनाप-शनाप सरकारी खर्च उसने जमकर बढ़ा दिया। लेकिन अर्थव्यवस्था के स्वस्थ व संतुलित विकास के लिए निजी निवेश, निजी खपत और निर्यात को भी बढ़ाना पड़ता है। सरकारी खर्च के रूप में अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का केवल एक इंजिन चलऔरऔर भी

सत्य के आधार पर ही जीवन-जगत का विकास होता है। सारा विज्ञान सत्य पर ही आधारित है। ज़रा-सी चूक बंटाधार कर देती है। चूक तो अनजाने में होती है। लेकिन झूठ तो जान-बूझकर सच्चाई को छिपाने के लिए बोला जाता है। सच नकारात्मक कभी नहीं, हमेशा सकारात्मक होता है। नए वर्ष व सम्वत 2080 की शुरुआत हमें सत्य के साथ ही करना चाहिए। आखिर हमारी अर्थव्यवस्था के द्रुत विकास का सच क्या है? चालू वित्त वर्ष 2023-24औरऔर भी