आज़ादी का अमृतकाल। आज़ादी के 76 साल पूरे। लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार दसवीं बार देश को संबोधन। सरकार के पास संसद में बहुमत इतना कि जो चाहे कर सकती है। समूचे देश में वही पूरी तरह आज़ाद है। दस दिन पहले ही अचानक उसने फरमान जारी कर दिया कि देश में पीसी से लेकर लैपटॉप, पामटॉप, ऑटोमेटिक डेटा प्रोसेसिंग मशीन और माइक्रो व लार्जफ्रेम कंप्यूटर तक के आयात के लिए लाइसेंस लेनाऔरऔर भी

जो बड़ा है, वो अच्छा हो, यह कतई ज़रूरी नहीं। यह जीवन से लेकर बिजनेस तक के लिए सच है। लेकिन बिजनेस का सच यह भी है कि जो अच्छी व शानदार कंपनियां हैं, वे ज़रूरी नहीं कि बड़ी कंपनियां हों। खासकर, भारत जैसे देश की हकीकत यह है कि यहां रोज़गार से लेकर निर्यात तक में सबसे बड़ा योगदान छोटी व औसत या मध्यम आकार की कंपनियों का है। निवेश के लिहाज़ से भी छोटी कंपनियांऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग उनके लिए खबरों और फंडामेंटल्स का खेल हो सकता है जिनके पास खबरें और कंपनी के नतीजे औरों से पहले पहुंच जाते हैं। ऐसी पहुंच वालों तक पहुंचना रिटेल ट्रेडर के लिए नामुमकिन है। उसके लिए तो शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग शुद्ध रूप से मनोविज्ञान का खेल है। इसमें भी उसे अपने साथ ही दूसरों की लालच और भय की भावनाओं के काम करने के तरीकों की तह में पहुंचना होता है। जोऔरऔर भी

शेयर बाज़ार अगर आपके निजी व पारिवारिक जीवन को अशांत बना दे रहा है तो फौरन इसे छोड़ देना चाहिए। ट्रेडिंग कर रहे हैं तो इससे हो रही कमाई से बीच-बीच में छुट्टी मनाते और आनंद लेते रहें। अच्छा फायदा कमा लिया तो उसका एक अंश अकेले अपने पर नहीं, बल्कि परिवार के साथ खुशी मनाने पर खर्च करें। उनका साथ व सहयोग आपके ट्रेडिंग के बिजनेस के लिए बहुत ज़रूरी है। परिवार के जिस भी सदस्यऔरऔर भी