वो विकास जिसका आधार सच नहीं झूठ
भारत विपुल संभावनाओं से भरा देश है। आर्थिक ही नहीं, राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी। हमने अभी तक जो हासिल किया है, वह हमारी अंतर्निहित सामर्थ्य से बहुत-बहुत कम है। लेकिन पूर्णता पाने के लिए सच को आधार बनाना और जिस झूठ ने हमारे व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक जीवन को दबोच रखा है, उसे जड़ से मिटा देना ज़रूरी है। असल में, कोई भी विकास सच को आधार बनाकर ही किया जाता है।औरऔर भी





