भारत संभावनाओं से भरा देश है। इसमें कोई दोराय हो ही नहीं सकती। यहां कमानेवाले लोग अगले करीब पचास साल तक रिटायर्ड लोगों से कहीं ज्यादा रहेंगे। एक अनुमान के मुताबिक भारत की आबादी का मध्यमान साल 2070 तक 29 साल रहेगा। साफ है कि सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य की कितनी भी उपेक्षा कर ले, हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड फिलहाल अक्षुण्ण है। गंगा की वेगवती धारा अपनी राह निकाल ही लेती है। भारत के नौजवान रोज़ी-रोजगार के साधनऔरऔर भी

अभी देश में स्टार्ट-अप्स की क्या स्थिति है? संसद में दी गई ताज़ा जानकारी के मुताबिक वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने कुल 92,683 स्टार्ट-अप्स को मान्यता दे रखी है। ये उद्यम जनवरी 2016 में सरकार द्वारा शुरू की गई स्टार्ट-अप इंडिया पहल के तहत टैक्स व गैर-टैक्स लाभ पा सकते हैं। सरकार ने खुद की पीठ थपथपाते हुए कहा कि देश में जहां 2016 में मात्र 442 स्टार्ट-अप थे, वहीं 28 फरवरी 2023 तक इनकी संख्या 92,683औरऔर भी

स्टार्ट-अप को लगी मार का सबसे तगड़ा असर शिक्षा टेक्नोलॉज़ी (एजुटेक) क्षेत्र के उद्यमों पर हुआ। इस क्षेत्र को साल 2021 में 4.1 अरब डॉलर की फंडिंग मिली थी। यह साल 2022 में घटकर 2.4 अरब डॉलर पर आ गई। असर यह हुआ कि 25 फंडेड एजुटेक स्टार्ट-अप बंद हो गए। इन बंद होनेवाले उद्यमों में लिडो लर्निंग, उदय्य, सुपरलर्न व क्रेजो.फन शामिल हैं। लिडो लर्निंग ने 2 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई थी। उसके बंद होनेऔरऔर भी

स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया का नारा सुनने में सबको बहुत अच्छा लगा था। लेकिन जब इन नए उद्यमों में बाज़ार की शक्तियों के बजाय सरकारी आश्रय का खेल चलने लगा तो बहुतेरे स्टार्ट-अप्स के शटर गिरने लगे। पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा 3484 स्टार्ट-अप साल 2018 में बंद हुए। साल 2021 में एक बार फिर इन उद्यमों में उत्साह दिखा। उस दौरान बंद होनेवाले स्टार्ट-अप्स की संख्या घटकर 1012 पर आ गई। लेकिन अगले ही सालऔरऔर भी