समय कितना बेरहम और भविष्य कितना अनिश्चित है! एनडीटीवी के अधिग्रहण के बाद जब हर तरफ अडाणी समूह की तूती बोल रही थी, उसकी शीर्ष कंपनी अडाणी एंटरप्राइसेज़ का 20,000 करोड़ रुपए का ऐतिहासिक एफपीओ (फॉलो-न पब्लिक ऑफर) आने ही वाला था, समूह के मुखिया गौतम अडाणी घूम-घूमकर मीडिया को इंटरव्यू दे रहे थे कि वे कितने ज़मीन से उठे उद्यमी और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखनेवाले व्यक्ति हैं (यहां तक कि कुछ लोग दबी जुबान सेऔरऔर भी

भारतीय गणतंत्र 73 साल का हो गया। देश के सभी समझदार व संवेदनशील नागरिकों को परखने की ज़रूरत है कि अब तक नियमित अंतराल पर बराबर चुनावों से गुजरता हमारा लोकतंत्र सत्ता तंत्र के मजबूत होते जाने का सबब बना है या सचमुच भारतीय लोक या गण शक्तिमान बना है। हमें यह भी देखना चाहिए कि प्राचीन भारत में गणतंत्र का क्या स्वरूप था, आज कैसा है और कैसा होना चाहिए। इन मसलों पर संक्षिप्त चर्चा करनेऔरऔर भी

ठीक एक हफ्ते बाद बुधवार, 1 फरवरी को नए वित्त वर्ष 2023-24 का बजट आना है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि इस बार का बजट अगले 25 सालों का टेम्प्लेट तय कर देगा। इसलिए सारा देश बड़ी बेसब्री से देख रहा है कि इस बार वे अर्थव्यवस्था के विकास का क्या खाका पेश करती हैं जिस पर अगले ढाई दशकों की भव्य इमारत खड़ी की जाएगी। यकीनन इस बार भी पूंजीगत व्यय कोऔरऔर भी