ज्यों-ज्यों निफ्टी 20,000 अंक के करीब पहुंचता जा रहा है, बाज़ार में उन्माद बढ़ता जा रहा है। लेकिन किसी भी किस्म का उन्माद समझदारी को धुंधला कर देता है और हम बहक कर गलत फैसले ले सकते हैं। इसलिए उन्माद में भी हमें संतुलित रहना चाहिए। वहीं, अगर मान लीजिए कि निफ्टी 20,000 का स्तर छूने से पहले ही फिसलकर गिर गया या लम्बे तक सीमित रेंज में भटकता रहे, तब भी हमें न तो हताश होनाऔरऔर भी

निफ्टी के गिरने की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। वो तो हर दिन नए से नया शिखर बनाता जा रहा है। 20,000 अंक से महज 6% दूर रह गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की खरीद जारी रही तो यह मंज़िल हफ्ते-दस दिन में ही हासिल हो सकती है। इसलिए हाल-फिलहाल ऐतिहासिक शिखर से 20% गिरने की आशंका खत्म हो चुकी है। दूसरे शब्दों में बाज़ार में मंदड़ियों का शिकंजा कसने के आसार नहीं दिख रहे। इसलिए ज्यादाऔरऔर भी

अतीत में निफ्टी के शिखर पर पहुंचने के बाद जो करेक्शन आए, वे अलग-अलग रहे हैं। जनवरी 2008 में निफ्टी शिखर पर पहुंचने के बाद सवा साल में 50% तक गिर गया था। यकीनन, अब उतना बड़ा करेक्शन होने की गुंजाइश नहीं दिखती। लेकिन बड़ा करेक्शन तो आ ही सकता है, इस आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। हाल का जो करेक्शन अक्टूबर 2021 के शीर्ष के बाद जून 2022 तक आया था, वोऔरऔर भी