किसी समय शेयर बाज़ार को अर्थवयवस्था का बैरोमीटर माना जाता था। लेकिन क्या आज ऐसा नहीं है। हमारा शेयर बाज़ार इस समय ऐतिहासिक ऊंचाई के इर्दगिर्द घूम रहा है। लेकिन अर्थव्यवस्था की हालत नवंबर 2016 की नोटबंदी के बाद जो बिगड़ी और कोरोना महामारी से जैसा उसे तहस-नहस किया गया, उसके बाद उमंग नहीं लौट पा रही। टैक्स संग्रह ज़रूर बढ़ रहा है। लेकिन सरकार के फालतू खर्च ज्यादा रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इन खर्चों कोऔरऔर भी