शेयरों की ट्रेडिंग बाज़ार में सक्रिय निवेशकों व ट्रेडरों की मानसिकता व आवेग को जानकर उनके बर्ताव को पहले से भांप लेने का खेल है। लेकिन यह कितना संभव है? आप अपने को समझ सकते हैं, अपने जैसे अन्य ट्रेडरों की चाल को समझ सकते हैं, लेकिन जहां देश के कोने-कोने के लाखों अनजान लोग ही नहीं, विश्व स्तर पर करोड़ों धनवान सक्रिय हों जिनकी नुमाइंदगी फाइनेंस की दुनिया के दिग्गज प्रोफेशनल कर रहे हों, वहां साराऔरऔर भी

रिटेल ट्रेडर को सबसे पहले अपनी मानसिकता व आवेगों को कायदे से जानना चाहिए। इससे वह अपने जैसे लाखों ट्रेडरों की मानसिकता को समझने के साथ ही खुद के आवेगों पर नियंत्रण पा सकता है। लेकिन उसके लिए सबसे बड़ी बात है प्रोफेशनल, एचएनआई और देशी-विदेशी संस्थागत निवेशकों व ट्रेडरों के रुख को समझना। इसमें उसकी सबसे ज्यादा मदद टेक्निकल एनालिसिस करती है। चार्ट असल में इस दमदार श्रेणी के निवेशकों व ट्रेडरों की सारी हरकत काऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग दरअसल कंपनियों के फंडामेंटल नहीं, बल्कि इस बाज़ार में सक्रिय ट्रेडरों के संभावित बर्ताव, उनकी मानसिकता और आवेगों को समझने का खेल है। यह ज़रूर है कि शेयरों के भाव खबरों से भी प्रभावित होते हैं। लेकिन रिटेल ट्रेडरों को खबरों से खेलने का ज़ोन पूरी तरह बड़े उस्तादों के लिए छोड़ देना चाहिए। इसलिए जिन दिन भी कंपनी या अर्थव्यवस्था की बड़ी खबर आनी हो, उस दिन उन्हें ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए।औरऔर भी

ट्रेडिंग में मोमेंटम और निवेश में मूल्य को समय से पहले कम भाव पर पकड़ लेना। शेयर बाज़ार से छोटी और बड़ी अवधि, दोनों में कमाने का सबसे सुंसगत तरीका यही हो सकता है। निवेश को समय से पहले कम भाव पर पकड़ लेने को वैल्यू इन्वेस्टिंग भी कहते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश के इसी तरीके से लम्बे समय में कमाते हैं। यह है क्या? मान लीजिए कि आपको परम्परात ज्ञान, बाज़ार व बिजनेस की समझऔरऔर भी