हमारा शेयर बाजार जिस तरह बढ़ते-बढ़ते गिरने लगा है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक खरीदते-खरीदते बेचने लगे हैं, उसमें ऐसी कोई उम्मीद नहीं बनती कि निफ्टी-50 जल्दी ही नया शिखर बनाने जा रहा है? वैसे भी जब तक रिटेल ट्रेडरों का भरोसा बाज़ार में नहीं बनता और निवेशक मौका पाते ही मुनाफा निकालने लगते हैं, तब तक बाज़ार में कोई भी तेज़ी लम्बी नहीं खिंच सकती। लेकिन बाज़ार में एक सिद्धांत और चलता है कि जब रिटेल ट्रेडरऔरऔर भी

अपने यहां मार्च 2020 में कोरोना के क्रैश के बाद शेयर बाज़ार में तेज़ी का जो दौर शुरू हुआ, उसमें रिटेल निवेशक झूमकर बाज़ार में आए। उन्हें गहरा यकीन था कि बाज़ार को बढ़ना ही बढ़ना है। इस दौरान जब भी बाज़ार गिरा, उन्होंने खरीद बढ़ा दी। उनकी यह पहल मुख्य रूप से म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों के ज़रिए हुई। इसमें इतना दम था कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली को वह पचाती गई। अबऔरऔर भी