रोज़ी-रोज़गार का विकल्प नहीं है ट्रेडिंग!
शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से घर-परिवार चला लेना आम इंसान के लिए महज़ एक सब्ज़बाग है। अगर कोई घर-परिवार व बच्चों की पढ़ाई से लेकर आकस्मिक खर्चों का इंतज़ाम एफडी की ब्याज या प्रॉपर्टी के किराए जैसे सुरक्षित व नियमित माध्यम से कर लेने की स्थिति में है और कम से कम 50 लाख रुपए ट्रेडिंग के लिए निकाल सकता है, वही यह काम कर सकता है। आज के दौर में मेडिकल जैसी आकस्मिक ज़रूरतों से लेकरऔरऔर भी
फाइनेंस की दुनिया की सीमा व बाधाएं!
नियमित आय का पुख्ता इंतज़ाम न किया तो शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग कभी भी मात दे सकती है। बीमार हुए, घर में कोई समारोह या खास काम आ गया तो ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। बाज़ार में अफरातफरी मची है, वो गिरता जा रहा है तो ट्रेडिंग करने में भयंकर रिस्क है जो आप नहीं उठा सकते। इस तरह किसी दिन या कई-कई दिन पाच हज़ार क्या, एक-दो हज़ार भी नहीं कमाया तो आगे की सारी गणना गड़बड़ाऔरऔर भी
उठता-गिरता बाज़ार जान पर पड़े भारी!
बड़ा आसान लगता है वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार से कमाना। जहां हर दिन हज़ारों करोड़ों का कारोबार हो रहा हो, वहां से अपने लिए दो-चार हज़ार रुपए निकाल लेना क्या मुश्किल है! दिन के 5000 रुपए कमा लिए तो 20 दिन की ट्रेडिंग में महीने के एक लाख रुपए हो जाएंगे। 20% टैक्स भी चला गया तो महीने के 80,000 रुपए अपने और परिवार के गुजारे के लिए काफी हैं। बड़ा आसान गणित और मासूम गणनाऔरऔर भी
शेयर बाज़ार रिस्की, आत्मघात न करें!
शेयर बाज़ार में पिछले कुछ महीनों से जिस तरह हाई टाइड चल रहा है, जो निफ्टी पहले दिन में 90-100 अंक ऊपर-नीचे होता था, वो अब दिन में 250-300 अंकों का दायरा तय करने लगा है, उसे देखते किसी भी अनजान व्यक्ति के लिए बाज़ार में घुसना बेहद खतरनाक है। लेकिन मरता क्या न करता? जब हर तरफ काम-धंधे का अकाल है, नौकरियों का टोंटा है तो नौजवान कोई भी रिस्क लेने को तैयार है। इनको लाखऔरऔर भी
शेयर बाजार से जीविका है बड़ा यज्ञ प्रश्न!
दो साल से कोरोना ने जितने लोगों को संक्रमित किया, जितने लोगों की जान ली, उससे कई-कई गुना ज्यादा लोग काम-धंधे के ठप हो जाने, नौकरी चले जाने या वेतन घटा दिए जाने से परेशान हैं। मेरा एक परिचित नौजवान पहले एनजीओ में नौकरी करता था। करीब साल भर पहले उसकी नौकरी चली गई तो उसने बेसब्री से पूछा कि क्या मैं शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से अपना घर-परिवार नहीं चला सकता? इस वक्त देश में ऐसेऔरऔर भी





