शेयर बाज़ार की तेज़ी या मंदी एकतरफा नहीं होती। उसका ग्राफ कभी एकदम सीधी रेखा में नहीं चलता। एक स्तर पर पहुंचने के बाद वह टूटता है, दिशा बदलता है और नया चक्र शुरू हो जाता है। इन चक्रों के ऊपर कोई सुपर-चक्र नहीं होता जो लगातार लम्बे समय तक एक ही दिशा में बढ़ता चला जाए। बाज़ार में मार्च 2020 के बाद तेज़ी का जो चक्र चल रहा है, वह भी देर-सबेर टूटेगा, दिशा बदलेगा। यहऔरऔर भी

शेयर बाज़ार को प्रभावित करनेवाले सारे कारक सही-सही पता हों तो उसकी भावी दशा-दिशा निकाली जा सकती है। यह कोई रॉकेट साइंस या चमत्कार नहीं, बल्कि सीधा-सीधा गणित है। अंकगणित नहीं तो बीजगणित से लेकर लीनियर अल्जेबरा व कैल्कुलस तक से हम सटीक गणना कर सकते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि शेयर बाज़ार में एक कारक अज्ञात है जिसका बहुत हुआ तो अनुमान भर लगा सकते हैं। वो है यहां सक्रिय इंसानों को मनोविज्ञान। हमें अपनाऔरऔर भी

नया साल मुबारक़। सम्वत 2077 गया और सम्वत 2078 शुरू। जो गया उसका लेखा-जोखा। जो आ रहा है उसका हिसाब-किताब। शाम को सवा छह से सवा सात बजे तक एनएसई और बीएसई में एक घंटे की मुहूर्त ट्रेडिंग का विशेष सत्र। पारम्परिक ट्रेडर लक्ष्मी-पूजा के बाद ज़रूर इसमें हिस्सा लेते हैं। रिटेल ट्रेडर आमतौर पर इससे दूर घर-परिवार के साथ खुशियां मनाते हैं। हालांकि अब इसमें प्रोफेशनल ट्रेडर ही नहीं, एफआईआई या विदेशी संस्थागत निवेशक भी शिरकतऔरऔर भी

लक्ष्मी का रूप बदलने से समाज की तमाम दीवारें टूटती गईं। पहले अपने यहां कहा जाता था – जाति न पूछो साधु की। अब नोटों के वर्चस्व ने सही मायनों में जाति-धर्म की सारी दीवारें तोड़ दी हैं। राजनीति ने निहित स्वार्थों के चलते बचाए न रखा होता तो आज जाति-धर्म की दीवारों का नामोनिशान तक नहीं मिलता। उधर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुद्राओं की देशी सीमाएं तोड़ चुका है। दुनिया में आज डॉलर कहीं भी चलता है। अंग्रेज़ीऔरऔर भी