कागज़ी शेरों से बचें ट्रेडर, सीखते जाएं बराबर
ट्रेडर को हमेशा जानते रहने के पीछे पड़ा रहना चाहिए। हवाई नहीं, काम का व्यावहारिक ज्ञान। यह ज्ञान साथ के भरोसेमंद ट्रेडरों से मिल सकता है। इंटरनेट पर देश-विदेश की जानकारियां सहज उपलब्ध हैं। सफल ट्रेडरों का अनुभव भी पढ़कर जान सकते हैं। लेकिन ऐसा करते वक्त हमेशा कागजी शेरों को अलग से पहचानना होगा, उनकी हवा-हवाई कहानियों से बचना होगा। सबसे अहम है बाज़ार में उपलब्ध डेटा में गोता लगाने का हुनर। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
न ट्रेनिंग, न गुरु, मिले सब कुछ सजगता से
आपको शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से प्रतिमाह कम से कम एक लाख रुपए कमाने हैं। अमूमन बीस दिन की ट्रेडिंग का मतलब, औसतन 5000 रुपए प्रतिदिन। हर दिन एक जैसा नहीं होता तो किसी दिन ज्यादा भी कमाना पड़ेगा। किसी भी स्तर की ट्रेनिंग, किसी गुरु की कृपा या किस्मत से यह नहीं मिलेगा। यह आपके सिस्टम, अनुशासन व सजगता से मिलेगा। द्रोणाचार्य बहाना हैं। एकलव्य को खुद अभ्यास से पारंगत बनना होगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
कारण जानें, शेयरों के भाव बढ़ते-घटते क्यों!
शेयर बाज़ार और ट्रेडिंग को 100% देने का क्या व्यावहारिक मतलब है? यही कि शेयर बाज़ार के चेहरे, चाल व चरित्र को अच्छी तरह समझते रहना। जीवन का यह मंत्र अपने मन में गहरे पैठा लें कि कुछ भी अकारण नहीं होता। जो हुआ, उसका कोई न कोई कारण ज़रूर होता है। शेयर के भाव बढ़े या गिरे तो उसका कोई न कोई कारण ज़रूर रहा होगा। तहकीकात से सही कारण तलाशते/जानते रहें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
शेयर बाज़ार पूरा 100% मांगता है, 99% नहीं
शत-प्रतिशत फोकस ट्रेडिंग पर नहीं रहा और मन-बुद्धि को नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम या टीवी चैनलों की सनसनी पर दौड़ाते रहे तो शेयर बाज़ार इसकी पूरी कीमत वसूल लेगा। याद रखें कि यह परीक्षा नहीं, स्पर्धा है। वैसे भी अब 99% पर ही कट-ऑफ लिस्ट बनने का ज़माना है। रत्ती भर भी पीछे तो कोई दूसरा बाज़ी मार ले जाएगा। फिर शेयर बाज़ार तो 100% ही मागता है। इसमें 99% से काम नहीं चलता। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी






