अगले सोमवार को बजट का दिन है। फिलहाल बाज़ार में कयास जारी हैं कि उसमें क्या-क्या हो सकता है। भांति-भांति की उम्मीदें तैर रही हैं। मसलन यह कि इस बार ऑटोमोबाइल उद्योग को खास राहत दी जा सकती है। इससे दोपहिया से लेकर कार व कमर्शियल वाहन बनानेवाली कंपनियों को फायदा होगा तो इनके शेयरों में जमकर खरीद हो रही है। नतीजतन, बीते हफ्ते 18 से 22 जनवरी के बीच निफ्टी ऑटो सूचकांक 5.57% बढ़ चुका है। बाज़ार इसी तरह बजट उम्मीदों की झांकी दिखाता है। अब सोमवार का व्योम…और भी

कस्टमाइजेशन का ज़माना है। उत्पाद व सेवाओं को ग्राहक की खास बुनावट व ज़रूरतों के हिसाब से ढाला जाता है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश में भी बिना हायतौबा मचाए कमाना है तो हमें अपने माफिक स्टॉक्स व कंपनियां चुननी होंगी। निवेश का पक्का फॉर्मूला है कि जिस कंपनी का धंधा, उसका बिजनेस मॉडल हमें अच्छी तरह समझ में आ रहा हो, उसी में धन लगाना चाहिए। किसी की नकल नहीं करनी चाहिए क्योंकि नकल मेंऔरऔर भी

सरकार के पास टैक्स का इतना टोंटा है कि बजट में उपहारों की बरसात नहीं कर सकतीं। उससे कर-मुक्त आय की सीमा बढ़ाने या टैक्स-रियायतों की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसके विपरीत सरकार कोरोना वैक्सीन का खर्चा निकालने के लिए किसी तरह का सेस ज़रूर लगा सकती है। असल में वह बुरी तरह घिर गई है। धन है नहीं, लेकिन धनवान दिखाना उसके लिए ज़रूरी है। इसलिए हवा-हवाई का अंदेशा ज्यादा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2021-22 का बजट आने में अब 11 दिन ही बचे हैं। इसमें सात दिन ट्रेडिंग होनी है। इन सात दिनों और बाद के सात दिनों में सारे कयासों, उम्मीदों और बजट प्रस्तावों का दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सरकार को टैक्स के नाम पर एक्साइज़ संग्रह में 48% रिकॉर्ड बढ़ोतरी मिली है जो मुख्यतः उसने पेट्रोल-डीजल पर ड्यूटी बढ़ाकर हासिल की है। बाकी टैक्स-संग्रह घटा है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था का हाल आगे क्या होगा, इसका सारा दारोमदार केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर है। आम बजट इसकी झांकी पेश करेगा। इस बार का बजट बेहद अहम है क्योंकि यह साबित करेगा कि कोरोना के संकट को किस हद तक अवसर में बदला जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का दावा है कि इस बार का बजट अभूतपूर्व होगा। वैसा, जैसा पहले कभी नहीं आया। बजट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी