स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2020 को शनिवार का दिन था। शनि का दिन यानी मानें तो दुर्बुद्धि का दिन। पिछली बार 15 अगस्त को गुरुवार का दिन था। गुरु का दिन, बुद्धिमत्ता का दिन। लेकिन तब 15 अगस्त 2019 के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से बड़ी दुर्बुद्धि वाली बात कही थी। उन्होंने ‘बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट’ का जिक्र करते हुए कहा था, “जनसंख्‍या विस्‍फोट हमारे लिए, हमारी आनेवाली पीढ़ी के लिए अनेक नए संकटऔरऔर भी

हम रिटेल ट्रेडर हैं। सीमित धन, समझ व संसाधन। मगर असीमित हौसला लेकर बाज़ार में उतरते हैं। यह असीमित हौसला या रिस्क लेना तभी काम आता है, जब हम सच को आधार बनाते हैं। बाज़ार का सच यह है कि यहां शत-प्रतिशत थोक व्यापारी कमाते हैं, जबकि 95% रिटेल ट्रेडर गंवाते हैं। बाकी 5% ट्रेडर इसलिए कमाते हैं क्योंकि थोक व्यापारियो की तरह थोक भाव पर खरीदते और रिटेल भाव पर बेचते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कहते हैं कि शेयर बाज़ार उद्यमों/कंपनियों की ‘प्राइस डिस्कवरी’ या ‘मूल्य निर्धारण’ का माध्यम है। जाहिर है कि ‘मूल्य निर्धारण’ वही कर सकता है जिसके पास भरपूर धन हो। क्या हम-आप कभी आईपीएल के खिलाड़ियों की बोली लगा सकते हैं? इसलिए शेयर बाज़ार में उतरते वक्त हमें हमेशा अपनी औकात याद रखनी चाहिए। नहीं तो इस नदी में हम मछलियों की तरह किसी न किसी उस्ताद में कांटे में फंस जान गवां बैठेंगे। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार समेत समूचा वित्तीय बाज़ार फाइनेंस का बाज़ार है। इस बाज़ार का सच यही है कि जिनके पास अपनी ज़रूरत से बहुत-बहुत ज्यादा इफरात धन है, वही यहां के मूल व्यापारी हैं। हमें लगता है कि इसमें धन की नदी बह रही है। मुठ्ठी या बर्तन डालो, जितना चाहो, निकालते जाओ। लेकिन प्यासे पांडवों और यक्ष के तालाब का किस्सा याद करें। प्यास मिटाने से पहले यक्ष प्रश्नों का जवाब देना पड़ेगा। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मान्यताओं और धारणाओं में फंसकर आप सच तक नहीं पहुंच सकते। लगेगा कि आप अपना भला कर रहे हो, लेकिन दरअसल दूसरे लोग आपके भोलेपन का फायदा उठाकर ऐश करते हैं। जीवन की तरह शेयर बाज़ार में भी यही होता है। धंधेबाज़ आपको तरह-तरह मान्यताओं और धारणाओं में उलझा देते हैं। आप उछाले गए बड़े नामों को आदर्श और उन्हीं की बातों को सच मान बैठते हो। फिर निरंतर घोखा खाते रहते हो। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी