उस्ताद के कांटे में मछली बन न फंसें

कहते हैं कि शेयर बाज़ार उद्यमों/कंपनियों की ‘प्राइस डिस्कवरी’ या ‘मूल्य निर्धारण’ का माध्यम है। जाहिर है कि ‘मूल्य निर्धारण’ वही कर सकता है जिसके पास भरपूर धन हो। क्या हम-आप कभी आईपीएल के खिलाड़ियों की बोली लगा सकते हैं? इसलिए शेयर बाज़ार में उतरते वक्त हमें हमेशा अपनी औकात याद रखनी चाहिए। नहीं तो इस नदी में हम मछलियों की तरह किसी न किसी उस्ताद में कांटे में फंस जान गवां बैठेंगे। अब गुरु की दशा-दिशा…

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