एलआईसी की आस्तियों का तोड़ नहीं
वित्त वर्ष 2018-19 में शेयर बाज़ार से एलआईसी का लाभ भले ही घट गया हो, लेकिन मार्च 2019 में उसके निवेश का बाज़ार मूल्य 28.74 लाख करोड़ रुपए रहा जो उससे पहले के वित्त वर्ष 2017-18 में उसके निवेश के बाज़ार मूल्य 26.46 लाख करोड़ रुपए से 8.62% ज्यादा है। साथ ही 2018-19 में उसकी कुल आस्तियां पहली बार 30 लाख करोड़ रुपए के पार जाकर 31.11 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गईं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
दम और पूंजी भी, फिर क्यों कमज़ोरी
एलआईसी ने बीते वित्त वर्ष 2018-19 में शेयर बाज़ार में कुल 68,621 करोड़ रुपए लगाए थे। इस पर उसने 23,621 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। लेकिन इससे पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में उसने बाज़ार से 25,646 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था, जबकि तब सेंसेक्स 3348 अंक बढ़ा था। इससे बाद के वर्ष में सेंसेक्स के 5417 अंक या 17% बढ़ने पर भी एलआईसी का बाज़ार से लाभ घट जाना अशुभ संकेत है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी
करोड़ों बीमाधारकों का कल है दांव पर
एलआईसी में शेयरधारक के नाते सरकार की कुल निधि 650.37 करोड़ रुपए है, जबकि उसमें करोड़ों बीमाधारकों की कुल निधि 27.92 लाख करोड़ रुपए है। यानी, सरकार की निधि के चार हज़ार गुना से भी ज्यादा। फिर भी सरकार ने एलआईसी को अपनी जायदाद समझ रखा है। उसके इस रवैये से ही इक्विटी निवेश से एलआईसी का लाभ बीते वित्त वर्ष में सेंसेक्स के 17% बढ़ने के बावजूद 7.89% घट गया। अब करते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
कचूमर निकल रहा है एलआईसी का
तेरह दिन पहले कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक में 9300 करोड़ रुपए की पूंजी डालने का फैसला किया। इसमें से 4743 करोड़ एलआईसी को लगाने हैं तो 4557 करोड़ केंद्र सरकार को। कारण, सरकार पहले ही आईडीबीआई बैंक की 51% इक्विटी एलआईसी को बेच चुकी है तो अब उसे इस डूबते बैंक को कंधा देना ही पड़ेगा। लेकिन आखिर सरकार के कहने पर वह करोड़ों बीमाधारकों का भविष्य कैसे दांव पर लगा सकती है? अब सोम का व्योम…औरऔर भी
बिजनेस जो बनता जा रहा सदाबहार
दुनिया हमेशा से भौतिक रही है और आगे भी रहेगी। लेकिन इसके सारे रिकॉर्ड, खासकर वित्तीय लेनदेन से जुड़े माध्यम डिजिटल होते जा रहे हैं। मुमकिन है कि भविष्य में भौतिक मुद्रा ही पूरी तरह खत्म हो जाए। इस पूरी प्रक्रिया ने बिजनेस की नई धारा पैदा कर दी है। यह एक ऐसा बिजनेस है जो दवा, इलाज व तेल-साबुन व टूथपेस्ट जैसे एफएमसीजी उत्पादों की तरह सदाबहार है। आज तथास्तु में इसी बिजनेस से जुड़ी कंपनी…औरऔर भी





