शेयर बाज़ार में बहुत ज्यादा तेज़ी अच्छी नहीं होती। खासकर तब, जब अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी न हो और ज्यादातर कंपनियों के नतीजे भी दबे-दबे आ रहे हों। अभी क्या हालत है? कुछ महीनों में लोगों ने चुनिंदा शेयरों को जमकर खरीदा तो सेंसेक्स व निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। उन्हें अब मुनाफा कमाना है। लेकिन चढ़े भाव पर उन्हें ग्राहक मिल नहीं रहे तो बाज़ार का रुक-रुककर गिरते जाना लाज़िमी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में शेयरों के भाव उठने-गिरने का एक बड़ा कारक यह है कि उसमें खरीदने के अधूरे ऑर्डर कितने और बेचने के अधूरे ऑर्डर कितने हैं। भाव के किसी स्तर पर अगर बेचने के अधूरे ऑर्डर खरीदने के अधूरे ऑर्डरों से काफी ज्यादा/कम होते हैं तो शेयर बढ़ने/गिरने का रुख छोड़कर गिरना/बढ़ना शुरू कर देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शेयरों के खरीद व बिक्री के ऑर्डरों को आपस में मैच करना होता है। अब मंगलवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में कोई भी अपना घाटा और दूसरों का फायदा कराने नहीं आया। यहां खरीदनेवाला इसी उम्मीद में खरीदता है कि वह शेयर दमदार है और उसे वह भविष्य में ज्यादा भाव पर बेचकर मुनाफा कमा लेगा। इस खरीददार को सौदा पूरा करने के लिए बेचनेवाला चाहिए होता है। वहीं, दूसरी तरफ बेचनेवाले को लगता है कि उस शेयर में अब ज्यादा दम नहीं बचा तो वह बेचकर निकल जाना चाहता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कंपनियां छोटी से बड़ी बनती हैं। कुछ राज्यों तक सीमित ब्रांड बढ़ते-बढ़ते बड़े ब्रांडों तक का अधिग्रहण कर लेते हैं और कंपनी अचानक क्षेत्रीय से राष्ट्रीय बन जाती है। उद्योग में एक तरीका अंदर से धीरे-धीरे बढ़ने का है जिसे ऑर्गेनिक या कार्बनिक विकास कहते हैं। दूसरा तरीका इन-ऑर्गेनिक विकास या अधिग्रहण का है। आज हम तथास्तु में ऐसी कंपनी पेश कर रहे हैं जो अधिग्रहण के जरिए बढ़ी है और उसकी भावी रणनीति भी यही है।औरऔर भी