साल 2017 का आखिरी हफ्ता। यह शेयर बाज़ार के लिए शानदार साल रहा। 23 दिसंबर 2016 से 22 दिसंबर 2017 के बीच सेंसेक्स 30.34% और निफ्टी 31.40% बढ़ा है। हर ट्रेडर को समीक्षा करने की ज़रूरत है कि बाज़ार ने जब इतना दिया तो उसने कितना कमाया? अगर बाज़ार से ज्यादा नहीं कमाया तो कहां चूक रह गई? मनन करें कि आखिर अपनी ट्रेडिंग के तरीके में आगे क्या सुधार कर सकते हैं? अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

समय व हालात के हिसाब से अगर बदले नहीं तो विशाल डायनासोर का वजूद भी मिट जाता है। कैसेट व वीसीआर जैसे न जाने कितने उद्योगों का अब कोई नामलेवा नहीं बचा। कंपनियां वक्त की मांग को देखते हुए तेल से सॉफ्टवेयर तक में शिफ्ट कर जाती हैं। हमें निवेश के लिए कंपनियां चुनते वक्त इस सच को हमेशा ध्यान में रखना पड़ता है। आज तथास्तु में पुराने के साथ नए को भी अपनाती एक तगड़ी कंपनी…औरऔर भी

गुजरात चुनावों में भाजपा के कमज़ोर बहुमत का असर यह होगा कि मोदी सरकार बाकी बचे करीब सवा साल के कार्यकाल में कठोर आर्थिक फैसले लेने से बचेगी और लोगों को लुभानेवाले फैसलों को तवज्जो देगी। हो सकता है कि शेयर बाज़ार इन फैसलों को बहुत उत्साह से न ले। दूसरे, सितंबर 2013 से चल रही तेज़ी के बाद बाज़ार में अभी नहीं तो कुछ महीने बाद मुनाफावसूली का दौर चल सकता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार के कुछ लोग पुराने अनुभव से बताते हैं कि गुजरात चुनावों से पहले के पंद्रह दिनों में शेयर बाज़ार अक्सर चढ़ता है, जबकि चुनाव बीतने के बाद के तीस दिनों में अमूमन गिरता है। हालांकि ऐसी मान्यताओं का कोई तार्किक आधार नहीं होता। लेकिन इनका मनोवैज्ञानिक पहलू ज़रूर होता है। सोचने की बात है कि साल भर से बढ़ रहे बाज़ार में कहीं इस गिरावट का आगाज़ तो नहीं हो गया है? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी