अच्छे लोग हैं, अच्छी कंपनियां भी
बुरे से बुरे दौर में भी समाज में अच्छे व मूल्यवान लोगों का अकाल नहीं होता। इसी तरह बाज़ार में अच्छी व मूल्यवान कंपनियां हमेशा उपलब्ध रहती हैं। बस, उनकी शिनाख्त करनी पड़ती है। समाज में अच्छे लोगों को भले ही मान न मिले, लेकिन बाज़ार में अच्छी कंपनियों को उनका मूल्य देर-सबेर मिल ही जाता है। इसलिए उन्हें तभी खरीद लेना चाहिए, जब उनका भाव कम चल रहा हो। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी
नज़रवाले समझ लेते हैं भावों का मर्म
बाज़ार में सौदे छिपाकर नहीं किए जाते। बैंक, बीमा या देशी-विदेशी संस्थाओं के सारे सौदे सरे-बाज़ार होते हैं। उनकी हर हरकत स्टॉक के भावों में दर्ज होती है। जिनके पास सही दृष्टि होती है, वे यह सच भावों के चार्ट पर अलग-अलग टाइमफ्रेम और गिने-चुने इंडीकेटरों की मदद से देख लेते हैं। बाकी लोग टिप्स खोजते हैं कि कौन-सा फंड, एफआईआई व बड़ा खिलाड़ी क्या खरीदने या बेचने जा रहा है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
हम रहें खबरों नहीं, संस्थाओं के पीछे
हर कोई हर काम नहीं कर सकता। न ही सभी सूचनाएं हर किसी के काम की होती हैं। शेयर बाज़ार के ट्रेडर के लिए सबसे अहम सूचना है सूचकांक या स्टॉक के भाव। हर खबर का असर उनमें समाहित होता है। यह काम करवाती हैं बड़ी-बड़ी रिसर्च फर्में व संस्थान। खबरों व विश्लेषण को पचाकर बैंक, बीमा कंपनियों व म्यूचुअल फंड जैसी संस्थाएं खेल कर चुकी होती हैं। इसे समझना हमारा काम है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
ट्रेडर हैं, कंपनी या डिस्ट्रीब्यूटर नहीं
हम अक्सर अपनी भूमिका भूल जाते हैं और पीर, बाबर्ची व भिश्ती सभी का काम करने लगते हैं। न भूलें कि हम शेयर बाज़ार के ट्रेडर हैं। माल/सेवा देना कंपनी का काम, उपभोक्ता तक पहुंचाना डीलर व डिस्ट्रीब्यूटर का काम। भाव इनकी ऊंच-नीच समेत सरकारी नीतियों और विदेशी बाज़ार की हलचल का सारा असर सोख चुका होता है। हमें तो थोक के भाव खरीदना और रिटेल के भाव में बेचकर मुनाफा कमाना है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी






