कालेधन को साफ करने की जिस वैतरणी के लिए सरकार ने देश के 26 करोड़ परिवारों को तकलीफ की भंवर में धकेल दिया, वह दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती हमारी अर्थव्यवस्था के लिए कर्मनाशा बनती दिख रही है। आईएमएफ जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगठन तक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का अनुमान 7.6 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है, जबकि चीन का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। यह केंद्र सरकारऔरऔर भी

बाज़ार चाहता है कि अर्थव्यवस्था को विकास अच्छी रफ्तार से हो। लोगों के पास ज्यादा खर्च करने की क्षमता हो। इसलिए इनकम टैक्स में छूट की सीमा ढाई से बढ़ाकर कम से कम चार लाख कर दी जाए। लेकिन अगर कैपिटल गेन्स टैक्स से कोई नकारात्मक छेड़छाड़ की गई, सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाया गया तो बाजार नाराजगी भी जता सकता है। लेकिन मोदी सरकार के लिए साहसिक सुधार का यह आखिरी बजट है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

यह अर्थव्यवस्था को प्रभावित करनेवाली बड़ी नीतियों का हफ्ता है। कल से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। पहले दिन आर्थिक समीक्षा पेश की जाएगी। उसके अगले दिन, 1 फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली अपना तीसरा बजट पेश करेंगे। वे बजट में विदेशी निवेशकों को नाराज़ करने का जोखिम नहीं उठा सकते। लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से चंद दिन पहले मतदाता को भी कतई हैरान-परेशान नहीं करेंगे। अब परखें सोम का व्योम…औरऔर भी

जीवन में रिस्क है। धंधे में भी रिस्क है। लेकिन सभ्यता के विकास के साथ इंसान ने रिस्क को संभालने का भी इंतज़ाम किया। छोटी कंपनियों ने निर्यात किया तो बड़ी कंपनियां नए भूगोल में ही पहुंच गईं। इधर अमेरिका व ब्रिटेन में अपने बाज़ार को बचाने का नारा लग रहा है। लेकिन तमाम बड़ी कंपनियों ने अपना बिजनेस दायरा सारी दुनिया में फैलाकर जोखिम कम कर लिया है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक बड़ी कंपनी…औरऔर भी

गणतंत्र दिवस बीत गया। राजधानी दिल्ली में समूचे भारत की सांस्कृतिक झांकियों से लेकर सामरिक शक्ति का प्रदर्शन भी हुआ। लेकिन हम एक बात भूल जाते हैं कि गणतंत्र में जितनी अहम भूमिका आमजन की है, उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका बाज़ार की है। सरकार या चंद व्यक्ति बाज़ार को अपनी उंगलियों पर नचाने लग जाएं तो आम नहीं, खासजन की मौज हो जाती है और गणतंत्र उसी पल दम तोड़ने लगता है। अब करें शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी