आप यह जानकर अचंभे में पड़ जाएंगे कि नोटबंदी के बाद कई शेयर हैं जो मात्र महीने भर के अंदर 45% से लेकर 90% से ज्यादा बढ़ चुके हैं। ऐसे पांच शेयर हैं – टान्ला सोल्यूशंस, आईटीआई, बारट्रॉनिक्स, आर एस सॉफ्टवेयर और टीवीएस इलेक्ट्रॉनिक्स। इन सभी का वास्ता आईटी उद्योग में हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर बनाने से है। माना जा रहा है कि नोटबंदी से इन्हें फायदा होगा तो इनके शेयर उछल गए। अब पकड़ें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शरद पवार जैसे बहुरंगी कलाकार की जगह मई 2014 में जब राधा मोहन सिंह को केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया तो आम धारणा यही बनी कि ज़मीन से जुड़े नेता होने के नाते वे देश की कृषि अर्थव्यवस्था ही नहीं, किसानों के व्यापक कल्याण का भी काम करेंगे। संयोग से उससे करीब सवा साल बाद मंत्रालय का नाम भी बदल कर कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय कर दिया गया। लेकिन उसके बमुश्किल महीने भर बाद राधा मोहनऔरऔर भी

नोटबंदी को लागू हुए चालीस दिन बीत गए। प्रधानमंत्री मोदी का दावा है कि पचास दिन में सब ठीक हो जाएगा। फिलहाल लोगों में सर्कुलेट हो रहे 500 और 1000 रुपए के करीब-करीब सारे पुराने नोट बैंकों में वापस आ चुके हैं। बचे-खुचे अगले दस दिन में आ जाएंगे। लेकिन उन नोटों की भरपाई नहीं हुई। इसलिए जगह-जगह से उपद्रव की खबरें आने लगी हैं। फिर भी ट्रेडर के लिए मौके कम नहीं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

दो-चार दिन, चंद हफ्तों या महीनों में शेयरों के भाव डर व लालच से तय होते हैं। इसलिए ट्रेडिंग करनेवालों को इन दो भावनाओं की गहरी समझ हासिल करनी पड़ती है। वहीं, दो-चार या दस-पंद्रह साल में शेयरों के भाव संबंधित कंपनियों के बिजनेस से तय होते हैं। निवेश व ट्रेडिंग की बारीकियां अलग हैं। दोनों में कंपनियां चुनने के आधार अलग हैं। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी जिसका अतीत, वर्तमान व भविष्य, तीनों दमदार दिखते हैं…औरऔर भी

स्टैंडर्ड डेविएशन की गणना में फंसने के बजाय हम शेयरों के भाव के रोजाना या साप्ताहिक चार्ट पर गौर कर लें तो उसका उतार-चढ़ाव हमें साफ दिख जाता है। ट्रेडिंग के लिए वे शेयर ही सबसे सही होते हैं जिनमें उतार-चढ़ाव ठीकठाक रहता है। मंथर गति से सीमित रेंज में चलते शेयरों में ट्रेडिंग से कमाना बहुत मुश्किल होता है। इसीलिए अक्सर निवेश और ट्रेडिंग के लिए मुफीद शेयर अलग-अलग होते हैं। अब करें शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी