स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हर कंपनी के शेयर का अलग बीटा होता है। बीटा सांख्यिकीय गणनाओं से निकाली गई एक संख्या है जिस तक पहुंचने में स्टैंडर्ड डेविएशन व वेरियंस का इस्तेमाल किया जाता है। बीटा बताता है कि कोई स्टॉक पूरे बाज़ार यानी मुख्य सूचकांक के साथ कितनी लय में चलता है। अगर यह एक है तो बाज़ार के एकदम साथ। इससे कम या ज्यादा होना उसकी सापेक्ष चंचलता को दिखाता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

एनएसई या बीएसई की वेबसाइट भावों के अलावा तमाम ऐसी सूचनाएं देती हैं जिनसे सच तक पहुंचने में मदद मिलती है। इसी तरह की एक सूचना है वैल्यू ऐट रिस्क या वार। कैश सेगमेंट के हर स्टॉक के बारे में बीएसई व एनएसई सांख्यिकी गणनाओं के आधार पर ‘वार’ से जुड़ी चार दरें देते हैं। इन्हें समझ लिया जाए तो अंदाज़ लग सकता है कि वो शेयर गिरा तो कितना गिर सकता है। अब गुरुवार का दशा-दिशा…औरऔर भी

मंगलवार को दशहरा। बुधवार मोहर्रम। दोनों में छिपा हुआ संदेश है असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की जीत। सत्यमेव जयते। आदर्श बाज़ार में भी अंततः सच ही जीतता है। लेकिन दिमाग पर धारणाओं की पट्टी बंधी हो तो सच सामने होते हुए भी नहीं दिखता। सच कहीं अकेले हीरे या मणि की तरह चमकता हुआ नहीं दिखता। वो सूचनाओं के मंथन, उनके मेल से निकलता है। सच सूचनाओं का सार है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

बांग्ला में सुमन कबीर का गाना है कि सुख में, दुख में, क्रोध में, शांति में, लड़ाई-झगड़े या अशांति; हर हाल में मैं तुम्हें ही चाहता हूं। कंपनियां भी इसी तरह हर सूरत में बिजनेस के मौके निकाल लेती हैं। मारकाट कोई अच्छी चीज़ नहीं। राजों-महाराजों की लड़ाई का ज़माना लद गया। लेकिन आज भी मुल्कों में लड़ाई होती है। युद्ध के साजोसामान बेचे जाते हैं। जबदस्त बिजनेस है। आज तथास्तु में डिफेंस उद्योग की एक कंपनी…औरऔर भी