उम्मीद से बेहतर नतीजों के बावजूद कोई शेयर गिर जाए तो समझ लेना चाहिए कि जिन्होंने पहले इसे खरीदा था, वे बेचकर मुनाफावसूली कर रहे हैं। गिरने का सिलसिला थम जाए, स्टॉक थोड़ा दम भर ले तो उसे खरीद लेना चाहिए क्योंकि ताज़ा खरीद के बल पर वो कुछ दिन में पहले जितना या उससे ऊपर के भाव तक जा सकता है। नतीजों के दौरान यह तरीका काफी लाभदायक साबित होता है। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

एक बात हमेशा गांठ बांधकर चलनी चाहिए कि बाज़ार में हम से ज्यादा मजबूत हज़ारों खिलाड़ी हैं। कौन क्या सोच पकड़ेगा, हमें नहीं पता। हमने जितने कारक गिने हैं, उसके अलावा बहुत से कारक हो सकते हैं जिन पर हमारा ध्यान न गया हो। इतने अनजान पहलुओं के बीच हमारे अतिविश्वास का कोई फायदा नहीं। इसलिए हर सौदे में गिनकर चलना चाहिए कि दांव उल्टा पड़ जाए तो मार को न्यूनतम कैसे रखेंगे। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार का हम कुछ बिगाड़ नहीं सकते। लेकिन कोई स्टॉक हमारे माफिक नहीं चलता तो गुस्से में भरकर उसे खरीद या बेच डालते हैं। मेरे गांव के विश्राम सिंह तहसील जा रहे थे मुकदमा लड़ने। साइकिल की चेन बार-बार उतर जा रही थी तो लेट होता जा रहा था। तहसील के पास पुलिया की चढ़ाई पर फिर चेन उतर गई तो मार-लाठी, मार-लाठी साइकिल को ही धुन डाला। मुकदमे की तारीख छूट गई। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

जो शेयर उठकर गिरता है, वो कहां तक गिरेगा, कोई भरोसा नहीं। लेकिन जो गिरकर उठता है, उसके बारे में इतना माना जा सकता है कि वो पिछले उच्चतम स्तर तक चला जाएगा। हम तथास्तु में आज जिस कंपनी के बारे में लिखने जा रहे हैं, वो सरकारी और सुरक्षित कंपनी है। उसके बारे में हमने निवेश की पहली सलाह करीब सवा साल पहले दी थी। लेकिन तब से वो काफी गिरने के बाद उठान पर है…औरऔर भी

कभी भी उधार के धन से ट्रेडिंग न करें। इसी नियम का हिस्सा है कि ब्रोकर कितना भी उकसाए, मार्जिन ट्रेडिंग कतई न करें। इससे आप दोहरे दबाव में आ जाते हैं। एक तो बाज़ार की अनिश्चितता। दूसरे, कर्ज़ पर ब्याज और समय पर अदायगी। ऐसे दबाव में 99.99% आशंका इस बात की है कि आप ट्रेडिंग का फैसला शांत व संतुलित दिमाग से नहीं ले पाएंगे तो पक्का पिट जाएंगे। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी