लाभांश देने पर दमकती है कंपनी
जीडीपी के आंकड़े बढ़ा देने से अर्थव्यवस्था नहीं बढ़ती, बल्कि अर्थव्यवस्था के बढ़ने से सही मायनों में जीडीपी बढ़ता है। ऐसा होने पर कंपनियों का बिजनेस बढ़ता है और साथ ही बढ़ जाता है उनका मुनाफा। यही मुनाफा उनके शेयरों के भाव बढ़ाता है। कुछ कंपनियां होती हैं जो कमाए गए लाभ का बड़ा अंश शेयरधारकों को बतौर डिविडेंड दे देती हैं। इससे उनका शेयर और ज्यादा चमक जाता है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी
जीत की कस्तूरी छिपी है आपके पास
जिस तरह कस्तूरी हिरण की नाभि में बसती है और वो उसकी तलाश में हर तरफ मारा-मारा फिरता है, उसी तरह वित्तीय बाज़ार से कमाई का सूत्र किसी बाहरी टिप्स-दाता या एनालिस्ट के पास नहीं, आपके अपने पास हैं। रिस्क मैनजमेंट इसकी बुनियाद है। फिर आप में जो भी खास हुनर है, चाहे वो गणना का हो या कयास लगाने का, उसे बाज़ार के वास्तविक डेटा से मिलाइए, जीत की कस्तूरी मिल जाएगी। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
बाज़ार जमूरा तो ये मदारी कंगाल क्यों!
हमारे वित्तीय बाजार में अंग्रेज़ी तो शिकारियों की भाषा बन गई है जो भारी-भरकम, रटे-रटाए शब्द या जुमले फेंककर आम लोगों की कमाई साफ करते हैं। लेकिन हिंदी में भी ऐसे ‘सलाहकारों’ की कमी नहीं है जो बराबर कहते फिरते हैं कि महीनों पहले उन्होंने जहां कहा था, निफ्टी आज वहीं चल रहा है। बार-बार फेंटते रहते हैं कि बाज़ार उनके इशारे पर नाचता है। लेकिन गुरुजी! आप खुद क्यों नहीं कमा लेते? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
पेपर आउट, फिर भी सब टॉपर नहीं
पता हो कि आगे क्या होनेवाला है, पूरा बाज़ार किधर जाएगा या कोई शेयर कहां तक गिरने के बाद पलट सकता है और जैसा पता था, हकीकत में वैसा ही हो जाए, तब भी बाज़ार में घाटा खानेवाले 95% ट्रेडर मुनाफा नहीं कमा सकते। इसका प्रमाण यहीं अर्थकाम के कॉलम से पाया जा सकता है। स्टॉक भीतर, लेकिन बाहर दाएं छोर पर निफ्टी की दशा-दिशा अक्सर सटीक बैठती है। लेकिन कमाया कितनों ने! अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






