अभी दुनिया की जो आर्थिक हालत है, चीन तक की स्थिति डांवाडोल है, उसे देखते हुए क्या भारत में अब भी दीर्घकालिक निवेशकों के लिए कोई संभावना बची है? यह विषय निबंध के लिए अच्छा है। लेकिन हम जैसे आम निवेशकों के लिए इसका कोई मायने-मतलब नहीं। इसे संस्थाओं की मगजमारी के लिए छोड़ देना चाहिए। हमें तो अच्छी कंपनी को सही भाव पर पकड़ने की कोशिश में लगे रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने अंततः ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की, जबकि दुनिया भर में माना जा रहा था कि वो इसे शून्य से 0.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.25 से 0.50 प्रतिशत कर सकता है। फेडरल रिजर्व की चेयरमैन जानेट येलेन ने भारतीय समय से गुरुवार-शुक्रवार की आधी रात के बाद यह घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा है जिसने वस्तुतः अमेरिकी केंद्रीय बैंक के हाथ बांध दिएऔरऔर भी

आपने पुराने सौदों की समीक्षा कर ली। पता लगा लिया कि सौदे उलटे पड़ने की वजह क्या हो सकती है। इसके बाद आपने अपने ट्रेडिंग सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा चाक-चौबंद कर लिया। फिर भी आप फौरन बड़े सौदों से दूर रहें। छोटे-छोटे ट्रेड से शुरू कीजिए। फिर एक दिन ऐसा आ जाएगा जब आपकी भावनात्मक पूंजी वापस लौट आएगी और आप फिर से बिना किसी प्रयास के ट्रेडिंग करने लग जाएंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय पूंजी अगर ट्रेडर का शरीर है तो भावनात्मक पूंजी आत्मा। इन दोनों का सही तालमेल सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है। लेकिन लगातार स्टॉप-लॉस लगने के बाद बड़े से बड़ा ट्रेडर अंदर से हिल जाता है। जॉर्ज सोरोस व जिम रोजर्स तक के साथ ऐसा होता रहा है। ऐसे में भावनात्मक पूंजी को बचाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि कुछ दिनों के लिए बाज़ार से दूर रहकर आत्मसमीक्षा की जाए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

रिस्क से निपटने की तैयारी न हो तो सबसे बड़ा नुकसान ज्यादा पूंजी गंवाने के अलावा यह होता है कि हम भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं। ध्यान रखें कि ट्रेडिंग में सबसे प्रमुख हथियार है हमारा भावनात्मक संतुलन। अगर वो टूटा तो हम ऐसे गलत कदम उठाते हैं कि उबरने के बजाय घाटे के दलदल में धंसते चले जाते हैं। युद्ध और ट्रेडिंग में अपनी भावनाओं पर काबू रखना निहायत ज़रूरी है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी