अनिश्चितता यहां, अंधा जोखिम नहीं
कल क्या होगा, कोई नहीं जानता। भावी अनिश्चितता कोई मिटा नहीं सकता। यह शाश्वत सच है। सदियों से चला आ रहा है। लेकिन आज के जमाने में फर्क यह पड़ गया है कि अनिश्चितता को नाथने के साधन आ गए हैं, खासकर फाइनेंस के क्षेत्र में। बीमा यही तो करती है। इसी तरह स्टॉक्स में निवेश अगर लार्जकैप, मिडकैप व स्मॉलकैप में बांटकर किया जाए तो जोखिम बहुत घट जाता है। तथास्तु में आज एक मिडकैप स्टॉक…औरऔर भी
दुकानदार बनते गए, ट्रेडर क्यों नहीं!
हम कभी किसान-प्रधान देश रहे होंगे। अब तो व्यापारियों के देश बनते जा रहे हैं। जिसको जहां जगह मिलती है, वहीं दुकान खोलकर बैठ जाता है। ज्वैलर के बगल में ज्वैलर, पानवाले के बगल दूसरा पानवाला, समोसे-पकौड़े की दुकानें एकदम सटी-सटी। सब कमा रहे होंगे, तभी तो दुकानें खोल रहे हैं। लेकिन अजीब विरोधाभास है कि हम ट्रेडर नहीं बन पा रहे। यहां बात शेयर व कमोडिटी बाज़ार की हो रही है। अधिकांश ट्रेडर घाटे में क्यों?औरऔर भी
इनसाइडर ट्रेडिंग नहीं, तभी भाव सही
बाज़ार का सबसे अहम रोल है भावों का सही-सही स्तर पकड़ना। इस काम में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। लेकिन शेयर बाज़ार में है यह बड़ा मुश्किल काम। एक तो यहां हज़ारों दमदार खिलाड़ी हैं। दूसरे भाव हर मिनट पर बदलते हैं। तीसरे यहां पर्दे के पीछे बहुत सारा खेल चलता है। कंपनी प्रवर्तकों, ब्रोकरों व संस्थागत निवेशकों में मिलीभगत रहती है। ऐसी इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के उपाय तलाशे जा रहे हैं। अब बढ़े ट्रेडिंग की ओर…औरऔर भी
जाहिर खबरें झांसा है, काम की नहीं
कल कोल इंडिया और एनटीपीसी दोनों में सुबह-सुबह मीडिया में नकारात्मक खबरें आ गईं। फिर भी कोल इंडिया का शेयर 1.26% और एनटीपीसी का शेयर 2.32% बढ़ गया। इसीलिए हम सावधान करते आए हैं कि आम लोगों को छपी खबरों के आधार पर ट्रेड नहीं करना चाहिए। असल में खबरों के आने और जाहिर होने का जो भी समीकरण है, वो हमारे लिए झांसे जैसा है। भावों में ही हर ऊंच-नीच समाहित है। अब गुरु का बाज़ार…औरऔर भी
उन्होंने खोजे नियम, अपनाते हैं हम
विख्यात अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने 1776 में छपी किताब वेल्थ ऑफ नेशंस में लिखा था कि बाज़ार में सप्लाई मांग से ज्यादा होने पर वस्तु के भाव गिर जाते हैं। मशहूर वैज्ञानिक आइज़ैक न्यूटन ने 1687 में बताया कि कोई भी वस्तु तब तक गतिशील रहेगी जब तक उसका मुकाबला उसके बराबर या उससे ज्यादा बल की वस्तु से नहीं होता। इन्हीं नियमों पर आधारित है मांग और सप्लाई की पद्धति। इसे अपनाते हुए करते हैं ट्रेडिंग…औरऔर भी





