हम सभी मूलतः रिटेल ट्रेडर ही तो हैं। लेकिन जब तक हम इस स्थिति से निकल प्रोफेशनल ट्रेडर का अंदाज़ नहीं अपनाते, तब तक पिटने को अभिशप्त हैं। लगातार घाटे से बचने के लिए हमें अपनी सोच को बदलना होगा। होता यह है कि जब प्रोफेशनल ट्रेडर या संस्थागत निवेशक खरीदते हैं, तब रिटेल निवेशक बेचते हैं। वहीं प्रोफेशनल ट्रेडर जब बेचते हैं, तब रिटेल निवेशक खरीदते हैं। इन मानसिकता को तोड़ने के लिए करते हैं अभ्यास…औरऔर भी

हर दिन राजनीति में नया बवाल। कतई साफ नहीं कि 2014 में देश में किसकी सरकार बनेगी। बहुतेरे निवेशक भविष्य की इस अनिश्चितता को लेकर परेशान हैं। पर सच यह है कि आखिरकार काम-धंधा और व्यापार ही राजनीति पर हावी पड़ते हैं। अगर भरोसा हो कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी बहुत आगे जाना है तो निवेश के आकर्षक मौके मौजूद हैं। आज एक ऐसा ही मिड कैप स्टॉक पेश है जो आपका धन दोगुना कर सकता है…औरऔर भी

यूं तो अनजान या कम जानकार निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार में लंबे समय का ही निवेश करना चाहिए जिसके लिए ‘तथास्तु’ आपकी अपनी भाषा में उपलब्ध इकलौती और सबसे भरोसेमंद सेवा है। फिर भी अगर आपने ट्रेडिंग का मन बना ही लिया है तो आप सबसे पहले यह समझ लीजिए कि आप जैसी और आपसे ठीक उलट राय रखने वाले लाखों लोग सामने मैदान में डटे हैं। उन्हें भी अपना धन और मुनाफा उतना ही प्याराऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में मांग और सप्लाई अक्सर स्थिर नहीं रहती। उनका संतुलन हर पल बदलता है। इसलिए भाव भी बराबर बदलते रहते हैं। कभी ऊपर तो कभी नीचे। भावों की गाड़ी हिचकोले खाते हुए चलती है। लेकिन कभी-कभी कुछ समय के लिए मांग और सप्लाई में बराबर का संतुलन बन जाता है। इसके बाद संतुलन टूटने पर भाव ऊपर या नीचे उछलते हैं। ट्रेडिंग में ऐसे मौके (एनआरएफ) बड़े काम के होते हैं। अब ट्रेडिंग शुक्र की…औरऔर भी

बाज़ार में जब भी संस्थागत निवेशकों या एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स) का बड़ा धन लगता है तो शेयर फौरन उछल जाते हैं। वहीं उनके बेचने पर शेयर खटाक से गिर जाते हैं। लेकिन रिटेल निवेशकों की खरीद/बिक्री का खास असर शेयरों पर नहीं पड़ता। जिस तरह हाथी के चलने से मिट्टी रौंदी जाती है, उसी तरह बड़ों की मार में छोटे निवेशक पिसते हैं। इसलिए कमाई बड़ों की राह पकड़ने से होती है। अब आज का बाज़ार…औरऔर भी