बाजार पर गिरावट की हल्की-सी मार पड़ने लगी है। आज जनवरी में उद्योग की विकास दर कितनी बढ़ी, इसे बतानेवाले औद्योदिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े आएंगे और गुरुवार को फरवरी में रही थोक मूल्य सूचकांकों पर आधारित मुद्रास्फीति के। इनसे हफ्ते भर बाद ब्याज दरें घटाने का माहौल बन सकता है। हालांकि रिजर्व बैंक गवर्नर डी. सुब्बाराव फिलहाल ऐसे किसी मूड में नहीं लगते। निफ्टी ने कल 5970 की बाधा तोड़ने की कोशिश की। मगर कामयाबऔरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2013-14 के बजट में सिक्यूटिरीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को लेकर वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ-साथ बजट दस्तावेजों ने भी जिस तरह का भ्रम पैदा किया है, उससे बड़े-बड़े चार्टर्ड एकाउंटेंट तक गच्चा खा जा रहे हैं। अभी हाल ही में मुंबई के मशहूर चार्टर्ड एकाउंटेंट विमल पुनमिया ने एक सेमिनार में बताया था कि शेयर बाज़ार में कैश डिलीवरी वाले सौदों पर एसटीटी खत्म कर दिया गया है। अलग से ‘अर्थकाम’ के पूछनेऔरऔर भी

निफ्टी को आज बाधा का सामना कर पड़ सकता है। पहली बाधा 5970 पर है। वहां भी क्लेश खत्म नहीं होगा। 6000 तक पहुंचना आसान नहीं है। इसलिए आज करेक्शन या गिरावट का अंदेशा है। फिर भी अगर निफ्टी 6000 का स्तर पार कर गया तो अगली बाधा उसे 6025 पर झेलनी पड़ेगी। अगले हफ्ते मंगलवार को रिजर्व बैंक बताएगा कि वह देश में औद्योगिक निवेश को बढ़ाने के लिए ब्याज दरों को घटाना सही मानता हैऔरऔर भी

यकीन नहीं आता। लेकिन कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की तरफ से निवेशकों को पूंजी बाज़ार में पारंगत बनाने के लिए जारी 156 पेज की नई किताब के पेज नंबर 84 पर बताया गया है कि, ‘भारतीय बाज़ार में केवल रिटेल निवेशकों को ही डे-ट्रेड की इजाज़त है।’ डे ट्रेडिंग का मतलब शेयरों की उस खरीद-फरोख्त से है, जिन्हें दिन के दिन में निपटा लिया जाता है। बाज़ार बंद होने से पहले ही सारी पोजिशंस काट ली जाती हैं।औरऔर भी

28 फरवरी 2013 तक देश में कुल डीमैट खातों की संख्या 2,09,19,851 हो गई है। इनमें से 1,26,32,085 खाते एनएसडीएल के पास हैं और 82,87,766 खाते सीडीएसएल के पास। माना जाता है कि 2.09 करोड़ डीमैट खातों में से अधिकतम नौ लाख खाते एचएनआई, एफआईआई, डीआईआई व ब्रोकरों जैसे बड़े निवेशकों के हो सकते हैं। बाकी दो करोड़ खाते रिटेल निवेशकों के हैं। 1992 में हर्षद मेहता कांड के फूटने से पहले देश में रिटेल निवेशकों कीऔरऔर भी

निफ्टी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन 1.41 फीसदी बढ़कर 5940 का स्तर तोड़ चुका है। इसलिए अगर कुछ अघट नहीं हुआ तो अब उसे 6000 का लक्ष्य भेदने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। हालांकि इसे 5970 पर तगड़ी बाधा का सामना करना पड़ा। फिलहाल माहौल में आशावाद है। रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भी तस्दीक कर दी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराते बादल छंट चुके हैं और अगले साल हमारी आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से ऊपरऔरऔर भी