आज सुबह 11 बजे रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते वक्त ब्याज दरें घटा सकता है। ज्यादातर लोगों का यही मानना है। हालांकि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी रिजर्व बैंक से यही अपील की है। लेकिन यह महज एक आशावाद है। रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव वही करते हैं जो उनकी समझ और विवेक कहता है। वे तो मौद्रिक नीति पर सलाह देने के लिए बनी समिति के बहुमत को भी ठुकरा कर फैसला करतेऔरऔर भी

बाज़ार में एक तरह का आशावाद छा गया है। थोक महंगाई की दर पहले से थोड़ा बढ़ गई। लेकिन इसमें मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई पहले से घट गई। और, रिजर्व बैंक इसे ही ब्याज दर में कटौती का आधार बनाता है। ऊपर से रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम की तारीफ करते हुए कहा है कि वे विकास को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। इससे लग रहा है कि अगले हफ्ते मंगलवार,औरऔर भी

बजट के बाद बाज़ार को सबसे बड़ा झटका। सेंसेक्स 1.03 फीसदी तो निफ्टी 1.06 फीसदी नीचे। वजह कोई खास नहीं। फिर भी बताते हैं कि बाज़ार को ब्याज दरें न घटने का भरोसा हो चला है। दूसरे, मॉरगन स्टैनले और एचएसबीसी ने कहा है कि नए साल में भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने की दर घट जाएगी। लेकिन असली खेल यह है कि छोटे-बड़े सभी निवेशक ज़रा-सा बढ़ने पर मुनाफा काटने में जुट जा रहे हैं। आज थोकऔरऔर भी

तंत्र के भीतर तंत्र। सत्ता के समानांतर सत्ता। भारतीय समाज व अर्थतंत्र में ऊपर-ऊपर दिख रही धाराओं के नीचे न जाने कितनी धाराएं बह रही हैं। ये विलुप्त सरस्वती भी हो सकती हैं और घातक कर्मनाशा भी। सहारा समूह ऐसी ही एक अनौपचारिक धारा का नाम है। धंधा तो है लोगों से पैसे जुटाना। लेकिन तरीका आम बैंकिंग से एकदम अलग। धंधे पर कई-कई परतों के परदे। तरह-तरह की बातें। कुछ भी पारदर्शी नहीं। पारदर्शिता के नामऔरऔर भी

जनवरी में देश का औद्योगिक उत्पादन 2.4 फीसदी बढ़ा है। यह उम्मीद से दोगुना है। फिर भी इन आंकड़ों के आने के बाद बाज़ार गिरता गया। कारण, लोगों को लग रहा है कि रिजर्व बैंक शायद अब ब्याज दरों में कटौती न करे क्योंकि कल ही ये आंकड़े भी सामने आए कि रिटेल महंगाई की दर फरवरी में बढ़कर 10.91 फीसदी हो गई है। गुरुवार को थोक महंगाई के आंकड़े आने हैं। वैसे अब भी ज्यादातर जानकारऔरऔर भी