आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने कोयला और लिग्नाइट पर मूल्य के आधार पर क्रमशः 14 फीसदी और 6 फीसदी रॉयल्टी लगाने की बात स्वीकार कर ली है। उसने यह फैसला कोयला मंत्रालय द्वारा गठित अध्ययन समूह की सिफारिशों के तहत किया है। अभी तक रॉयल्टी के लिए बड़ा ही मिश्रित किस्म का फार्मूला चलता रहा है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुरुवार को अपनी बैठक में तय किया कि कोयले पर 14 फीसदी रॉयल्टी शुल्कऔरऔर भी

सरकारी सहायता न पानेवाले अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर देश के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को अपनी 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होंगी और उन्हें मुफ्त में शिक्षा देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। इसलिए इसे अपनाने की आखिरी कानूनी अड़चन हट गई है। सुप्रीम कोर्ट में तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने बहुमत से येऔरऔर भी

केंद्रीय मंत्रिमंडल घरेलू एयरलाइन कंपनियों में विदेशी एयरलाइंस की इक्विटी हिस्सेदारी देने के मसले पर अगले हफ्ते विचार करेगा। इस पर आज, गुरुवार को विचार होना था। लेकिन अब इसे अगले हफ्ते के लिए टाल दिया है। यह जानकारी खुद नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने दिल्ली में मीडिया को दी। अभी का नियम यह है कि भारतीय एयरलाइन कंपनियों में 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हो सकता है। लेकिन विदेशी एयरलाइंस इनमें निवेश नहीं करऔरऔर भी

कहा जाता है कि झूठ तीन तरह के होते हैं – झूठ, शापित झूठ और आंकड़े। इसमें अगर आंकड़े भी खुद झूठे निकल जाएं तो झूठ की तो पराकाष्ठा हो जाती है। मामला कोढ़ में खाज का हो जाता है। गुरुवार को ऐसा ही हुआ, जब सरकार ने फरवरी के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों को जारी करने के साथ ही बताया कि उसने जनवरी में आईआईपी के 6.8 फीसदी बढ़ने की जो बात कही थी,औरऔर भी

बड़ी जटिल सोच और संरचना है बाज़ार की। औदयोगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के फरवरी के आंकड़े तो खराब ही रहे। मात्र 4.1 फीसदी औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है फरवरी में। लेकिन इससे भी बड़ा सदमा यह था कि जनवरी में आईआईपी में 6.8 फीसदी बढ़त के जिस आंकड़े को लेकर खुशियां मनाई गई थीं, वह झूठा निकला। अब सीएसओ (केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय) का कहना है कि चीनी उद्योग ने जनवरी के बजाय नवंबर से जनवरी तक के आंकड़ेऔरऔर भी

मित्रों, इस कॉलम में जब भी हम किसी शेयर में निवेश की सिफारिश करते हैं तो अक्सर आगाह करते रहते हैं कि खुद ठोंक-बजाकर देख लेने के बाद ही निवेश करें। जैसे, 11 अप्रैल 2011 को हमने यहां सुप्रीम इंडस्ट्रीज में निवेश की सलाह देने के साथ लिखा था, “कोई कंपनी जब अच्छी तरह में समझ में आ जाए, उसमें भावी विकास की गुंजाइश नजर आए, तभी उसके शेयरों में निवेश करें। हमारे या किसी और केऔरऔर भी

न जाने कितने जिरहबख्तर बांधे फिरते हैं हम। कभी भगवान, कभी परिवार, कभी परंपरा तो कभी नौकरी का कवच कुंडल हमारी हिफाजत करता रहता है। बहादुर वो है जो इस सारी सुरक्षा को तोड़कर सीधे सच का सामना करता है।और भीऔर भी