देश में गरीबी कम होने पर योजना आयोग के ताजा आंकड़ों के बाद संसद में नया बवाल मच गया है। लेकिन योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इस पर सफाई दी है कि इन आंकड़ों को किसी भी सरकारी योजना के लाभार्थियों से जोड़कर देखना सही नहीं है। अहलूवालिया पहले ही इसी तरह का तर्क देते रहे हैं। बता दें कि सोमवार को योजना आयोग की ओर से जारी आंकड़ों में कहा गया है किऔरऔर भी

जो लोग ममता बनर्जी के तीखे तेवरों के बाद यूपीए सरकार के अस्थिर होने की बात कर रहे थे, उनके लिए बुरी खबर है कि माया और मुलायम दोनों मजबूती से सरकार के साथ डट गए हैं। मंगलवार को सरकार को उस समय राहत मिली, जब समाजवादी पार्टी और बीएसपी के समर्थन से एनसीटीसी सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के संशोधनों को खारिज कर दिया गया। तृणमूल कांग्रेस मतदान में अनुपस्थित रही। सपा व बीएसपी केऔरऔर भी

महिंद्रा सत्यम (पुराना नाम सत्यम कंप्यूटर) और टेक महिंद्रा के निदेशक बोर्ड बुधवार को दोनों कंपनियों विलय पर विचार-विमर्श करेंगे। मंगलवार को इस घोषणा के बाद महिंद्रा सत्यम का शेयर 4.66 फीसदी बढ़कर 74.15 रुपए और टेक महिंद्रा का शेयर 5.13 फीसदी बढ़कर 648.35 रुपए पर बंद हुआ। माना जा रहा है कि सत्यम महिंदा को टेक महिंद्रा में मिला दिया जाएगा और महिंद्रा सत्यम के शेयरधारकों को अपने 9 शेयरों के बदले टेक महिंद्रा का एकऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन मामले में सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। सरकार ने कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी कि जिसमें कहा गया था कि वोडाफोन इंटरनेशनल और हचिसन ग्रुप के बीच विदेश में हुए सौदे पर 11,000 करोड़ रुपए टैक्स लगाना आयकर विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाड़िया और न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन ने मगलवार को कक्ष के भीतर सुनवाई के दौरान वोडाफोन टैक्सऔरऔर भी

किंगफिशर एयरलाइंस के खिलाफ उसके बकाया करों को लेकर मुकदमा दायर किया जा सकता है और संबंधित लोगों को जेल हो सकती है। अब इस संकटग्रस्त एयरलाइंस को बचाने का जिम्मा इसके चेयरमैन विजय माल्या का है। नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान यह बयान दिया। जहां अजित सिंह हफ्ते-दो हफ्ते पहले तक किंगफिशर एयरलाइंस को बंद न होने देने की बात कर रहे थे, वहीं अब उनका कहना हैऔरऔर भी

धीरे-धीरे बजट की कलई उतर रही है और सारी दुनिया को समझ में आ रहा है कि वो कितना और क्यों बुरा है। बजट में सबसे खतरनाक प्रावधान जीएएआर (जनरल एंटी एवॉयडेंस रूल) का है जो कहीं न कहीं मानकर चलता है कि हर करदाता करचोर है और इसलिए उसे सज़ा दी जानी चाहिए। आयकर विभाग को फिलहाल जिस तरह की अंधाधुंध सत्ता मिली हुई है, उसमें लोगों को खामखां परेशान करने और भ्रष्टाचार के मामले इससेऔरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए हम ऐसे स्टॉक्स चुनते हैं जो खरीद-फरोख्त के असर से घट-बढ़ सकते हैं, जबकि निवेश में हम ऐसी कंपनियों को चुनते हैं जिनका धंधा पुख्ता आधार पर खड़ा हो और जिसमें बढ़ने की भरपूर गुंजाइश हो। दिक्कत है कि हममें से 99 फीसदी लोग ट्रेडिंग की मानसिकता रखते हैं। छाया के पीछे भागते हैं और माया गंवाते रहते हैं। यह रुख न तो देश की अर्थव्यवस्था और न ही हमारे दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य केऔरऔर भी

तर्क की हद तक वहीं खत्म हो जाती है, जहां तक चीजें रैखिक होती हैं। धरती को जब तक चिपटा माना जाता रहा, तब तक तर्क ही सर्वोपरि थे। लेकिन धरती के गोल होते ही तर्क का सारा पटरा हो गया।और भीऔर भी