एक और दिन गुजर गया और बाजार के तमाम लोग जिस करेक्शन या गिरावट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, वह आज भी नहीं हुआ। हमें उम्मीद थी कि निफ्टी 5610 तक जाएगा। लेकिन वह तो दोपहर 2.40 बजे के आसपास 5621.50 तक पहुंच गया और आखिर में 0.77 फीसदी की बढ़त के साथ 5607.15 पर बंद हुआ। निफ्टी फरवरी फ्यूचर्स 5634.70 तक जाने के बाद 5620.20 पर पहुंच गया। मैंने जैसा आपको पहले बताया था,औरऔर भी

एक तरफ किंगफिशर एयरलाइंस अपना वजूद बचाने के चक्कर में लगी हुई है, सरकार ने उसे कोई भी आर्थिक पैकेज देने से इनकार कर दिया है, उसकी उड़ानें रद्द होने का सिलसिला जारी है, दूसरी तरफ कुछ लोग आम निवेशकों को इसके शेयर खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्टॉक जल्दी ही ‘बाउंस-बैक’ करेगा। निवेशकों को ऐसे लोगों की बातों में कतई नहीं आना चाहिए क्योंकि वे लोग वैसे घाघ उस्तादों केऔरऔर भी

किसी शेयर की बुक वैल्यू 320 रुपए हो और उसका शेयर इसके लगभग आधे भाव पर ट्रेड हो रहा तो आप क्या करेंगे? ऊपर से शेयर दस से नीचे के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा तो हर कोई कहेगा – लूट लो, यह शेयर तो साल भर में दोगुना हो ही सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या बुक वैल्यू का ज्यादा होना ही निवेश का पर्याप्त मानदंड है? क्या कम पी/ई का मतलब उसऔरऔर भी

नित नए-नए प्रेक्षण से पुरानी धारणाएं बदलती ही नहीं, परिष्कृत होती चलती हैं। लेकिन जिसने आंख, कान, नाक बंदकर प्रेक्षण करना ही बंद कर दिया है, वे तो ताज़िंदगी गांधी के तीन बंदर ही बने रहेंगे।और भीऔर भी

साल 2012 का पहला आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) बड़े ही धमाकेदार अंदाज में आ रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमसीएक्स) का इश्यू बुधवार को खुलेगा और प्राइस-बैंड 860 से 1032 रुपए रखा गया है। लेकिन ग्रे मार्केट में अभी से इसमें ऊपरी मूल्य पर 350 से 400 रुपए का प्रीमियम चल रहा है। इससे आईपीओ के प्रति निवेशकों के रुझान का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। निवेशकों को इस इश्यू से शुरुआत में हीऔरऔर भी

सोमवार को महाशिवरात्रि की छुट्टी। बाजार मंगलवार को खुलेगा। डेरिवेटिव सौदों का सेटलमेंट इसके दो दिन बाद गुरुवार 23 फरवरी को पूरा होगा। इस तरह रोलओवर के लिए मंगलवार को मिलाकर तीन दिन ही बचे हैं। सिद्धांत कहता है कि बीते हफ्ते जिस तरह बाजार 3 फीसदी बढ़ा है, उसमें अब करेक्शन आना चाहिए। लेकिन भारतीय बाजार का व्यवहार कहता है कि गुरुवार तक ऐसा होने के आसार नहीं है। कुछ जानकारों का कहना है कि शुक्रवारऔरऔर भी

लगे रहने से भगवान के सिवा सब कुछ मिल जाता है। भगवान भी इसलिए नहीं क्योंकि उसे खोजते-खोजते तो हम अपनी ही गुप्त गुफाओं में पहुंचकर अपने ही भव्य व विराट स्वरूप के सामने आ खड़े होते हैं।और भीऔर भी

किसी गिरते बूढ़े को उठाकर तो देखो! सड़क पर गिरे पड़े किसी घायल को अस्पताल पहुंचाकर तो देखो! घर से भागे किसी बच्चे को आसरा देकर तो देखो! जानवर से उठकर कभी इंसान बनकर तो देखो!और भीऔर भी

शेयर बाजार से नोट कमाना तालाब से मछली पकड़ने जैसा काम नहीं है कि बंशी डालकर बैठ गए और फिर किसी मछली के फंसने का इंतज़ार करने लगे। शेयर बाजार में किस्मत का खेला भी कतई नहीं चलता। यहां से तो कमाने के लिए पौधे लगाकर फल-फूल पाने का धैर्य चाहिए। घात लगाकर सही मौके को पकड़ने की शेरनी जैसी फुर्ती चाहिए। और, सही मौके की शिनाख्त के जरूरी है सही जानकारी। फिर सही जानकारी से सारऔरऔर भी

इंसान अपनी मंज़िल से उतना ही दूर है, जितना दूर वो अपने कुतूहल से है। जानने की इच्छा न हो, नए से नया देखने का कौतूहल न हो तो इंसान चलता ही नहीं; और, चले बिना मंजिल भला किसे मिलती है!और भीऔर भी