देश का निर्यात दिसम्बर महीने में 6.7 फीसदी बढ़ा है। आधिकारिक आंकड़ों की घोषणा से पहले ही वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने राजधानी दिल्ली में सोमवार को मीडिया को बताया कि दिसम्बर 2011 में देश से 25 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जबकि आयात 37.8 अरब डॉलर का हुआ।  इस तरह दिसंबर का व्यापार घाटा 12.8 अरब डॉलर रहा है। नवम्बर महीने में निर्यात मात्र 3.87 फीसदी बढ़ा था। दिसंबर के आंकड़ों को मिला दें तो चालूऔरऔर भी

सस्ते टैबलेट लैपटॉप ‘आकाश’ के लिए कनाडा की कंपनी डाटाविंड के साथ करार जारी रहेगा। कंपनी पहली खेप के लिए निर्धारित एक लाख में से बाकी बचे सत्तर हजार टैबलेट के अपग्रेडेड वर्जन उपबल्ध कराएगी। अपग्रेडेड वर्जन ‘आकाश-दो’ अप्रैल महीने तक उपलब्ध होगा। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल सोमवार को राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आकाश की मांग बहुत अधिक है। हम सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में छात्रों तक उसकी उपलब्धताऔरऔर भी

पहले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों ने खुशखबरी दी कि नवंबर में यह 5.9 फीसदी बढ़ गया है। फिर दिसंबर की मुद्रास्फीति ने साफ कर दिया कि करीब दो साल से अर्थव्यवस्था के सीने पर धमधम करता बोझ हल्का पड़ गया है। सोमवार को वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक सकल मुद्रास्फीति की दर दिसंबर 2011 में 7.47 फीसदी रही है। इससे पिछले महीने नवबंर में यह 9.11 फीसदी थी औरऔरऔर भी

फ्रांस के डाउनग्रेड के बाद बाजार में एक बार फिर हल्की-सी सिहरन दौड़ गई। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधरते मूलाधार यूरोपीय कारकों को बेअसर करने के लिए काफी हैं। दिसंबर में मुद्रास्फीति की दर 7.47 फीसदी पर आ चुकी है। यह साफ संकेत इस बात का है कि ब्याज दरों में कटौती अब ज्यादा दूर नहीं है। मुद्रास्फीति की दर पर हमारा अनुमान 7.5 फीसदी से 8 फीसदी का था। वास्तविक आंकड़े का इससे कम रहना बाजारऔरऔर भी

बिग बाजार और फ्यूचर समूह के मालिक किशोर बियानी का नाम आपने जरूर सुना होगा, लेकिन प्राइवेट इक्विटी फंड एवरस्टोन कैपिटल के सह-संस्थापक समीर सैन का नाम शायद ही सुना हो। मगर बियानी और सैन आपस में एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते-समझते हैं। असल में समीर सैन गोल्डमैन सैक्श के प्रबंध निदेशक रह चुके हैं और 2006 में उन्होंने ही बियानी के साथ मिलकर फ्यूचर कैपिटल होल्डिंग्स का गठन किया था। ठीक चार साल पहले जनवरीऔरऔर भी

भावुक होना जरूरी है क्योंकि महज बुद्धि के दम पर हम सच तक नहीं पहुंच सकते। लेकिन बुद्धि को कभी इतनी दूर घास चरने नहीं भेज देना चाहिए कि किसी को हमारी भावनाओं से खेलने का मौका मिल जाए।और भीऔर भी