पल में तोला, पल में माशा। रिटेल सेक्टर के जो शेयर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के फैसले के बाद बल्ले-बल्ले उछल रहे थे, वे इस फैसले को ठंडे बस्ते में डालने की अपुष्ट खबरों के आते ही धड़ाम-धड़ाम गिर गए। आज पैंटालून रिटेल 12.86 फीसदी, कूटोंस रिटेल 6.49 फीसदी और ट्रेंट 3.28 फीसदी गिर गए। शॉपर्स स्टॉप भी एनएसई में दिन के दौरान 9.35 फीसदी गिरने के बाद संभला और आखिर में 4.72 फीसदी के साथ बंदऔरऔर भी

बहुत सारी कंपनियां बहुत सारी वजहों से इल्लिक्विड हो जाती हैं। लेकिन बी ग्रुप की किसी अच्छी-खासी कंपनी में अगर बिना किसी वजह के दिन भर में केवल एक शेयर की खरीद-फरोख्त हो तो हमारे पूंजी बाजार नियामक, सेबी को जरूर सोचना चाहिए कि बाजार में ऐसा सन्नाटा क्यों है भाई? यहां बुरे का बोलबाला, अच्छे का मुंह काला क्यों है? दक्षिण भारत की कंपनी श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस के साथ बीते हफ्ते यही हुआ। शुक्रवार, 2औरऔर भी

कितना अजीब है कि जो भावनाओं से हीन हैं, वे हम सबकी भावनाओं से खेलते हैं। नेता से अभिनेता और कॉपीराइटर तक। पर जो भावनाओं से भरे हैं, उनमें शहादत का भाव तो लबालब है, सीखने का सब्र नहीं।और भीऔर भी

बाजार 5400 से गिरकर 4750 तक पहुंच गया। फिर अचानक उठकर 5050 के ऊपर। महीने भर में गोते और छलांग का यह खेल बखूबी चला। क्यों, कैसे? समझ में नहीं आता। एफआईआई ने तो पूरे नवंबर माह में 80 करोड़ डॉलर ही निकाले। इतनी रकम तो एक दिन में निकल जाया करती है। फिर ऐसी डुबकी क्यों? सवाल यह भी है कि क्या निफ्टी के पलटकर 5050 के ऊपर पहुंचने को नई तेजी का आगाज़ मान लियाऔरऔर भी

अनुभूति पहले आती है। शब्द बाद में आते है। शब्दों के खो जाने के बाद भी अनुभूति बची रहती है क्योंकि वही मूल है, शब्द तो छाया हैं। दोनों में द्वंद्व है समाज और व्यक्ति का, इतिहास और वर्तमान का।और भीऔर भी

अक्सर बहुत सारी बातें सिद्धांत में बड़ी सतरंगी होती हैं, लेकिन व्यवहार में बड़ी बदरंग होती हैं। सिद्धांततः माना जाता है कि शेयरधारक अपने हिस्सेदारी की हद तक कंपनी का मालिक होता है। लेकिन सच्चाई में ऐसा बस मन का धन है। सौ-दो सौ या हजार-दो हजार शेयर रखनेवालों की तो बात छोड़ दीजिए, 10-15 फीसदी हिस्सेदारी रखनेवाले संस्थागत निवेशकों (एफआईआई, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां) तक का कोई योगदान कंपनी के फैसलों में नहीं होता है। पब्लिकऔरऔर भी

चीजें वही, लोग भी वही रहते हैं। लेकिन जान-पहचान होते ही उनका पूरा स्वरूप बदल जाता है। पूर्वाग्रह छंट जाते हैं। असली छवि सामने आ जाती है। इसलिए दूर के नहीं, पास के रिश्ते बनाने जरूरी हैं।और भीऔर भी

सरकार ने सभी पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बनाने को मंजूरी दे दी है। इस नेटवर्क की शुरुआती अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपए है। फिलहाल राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) से कहा गया कि वह बीएसएनएल, रेल टेल व पावर ग्रिड जैसे तमाम दूरसंचार ऑपरेटरों के मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क की जीआईएस मैपिंग करे ताकि पता लगाया जा सके कि सभी 2.50 लाख पंचायतों को जोड़ने के लिए कुलऔरऔर भी

अब केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, केन्‍द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) और स्वायत्त व संवैधानिक निकायों तक को सारी निविदाओं की सूचना एक पोर्टल पर देनी होगी। वित्त मंत्रालय ने 30 नवंबर को ऐसा केन्‍द्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल बनाने का निर्देश जारी कर दिया है। मंत्रालय के व्यय विभाग ने यह फैसला सार्वजनिक खरीद पर विनोद धाल की अध्‍यक्षता में गठित समिति के सिफ़ारिशों और भ्रष्‍टाचार को रोकने व पारदर्शिता लाने के लिए मंत्री समूह के निर्णयऔरऔर भी

माइक्रो फाइनेंस सस्थाओं को अब गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की ही एक श्रेणी बना दिया गया है। रिजर्व बैंक मे शुक्रवार को बाकायदा इस बाबत एक अधिसूचना जारी कर दी। अभी तक एनबीएफसी की छह श्रेणियां हैं – एसेट फाइनेंस कंपनी, इनवेस्टमेंट कंपनी, लोन कंपनी, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी, कोर इनवेस्टमेंट कंपनी और इंफ्रास्ट्रक्चर डेट फंड – एनबीएफसी। अब इसमें एनबीएफसी – माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन नाम की सातवीं श्रेणी जोड़ दी गई है। रिजर्व बैंक का कहना हैऔरऔर भी