भले ही दो दिन बाद शुक्रवार को रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी में बैठा हो, लेकिन खुद उसका मानना है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में कंपनियों का पूंजी निवेश उम्मीद से कम रह सकता है। इसकी खास वजह लागत सामग्रियों के महंगा होने के साथ-साथ पूंजी का महंगा होना या दूसरे शब्दों में ब्याज दरों का ज्यादा होना है। रिजर्व बैंक ने मंगलवार को जारी सितंबर महीने की अपनी बुलेटिन में साफ-साफ कहा हैऔरऔर भी

मुंबई की एक विशेष अदालत ने 1992 के प्रतिभूति घोटाले के मुख्य दोषी हर्षद मेहता की जब्त संपत्ति से 650 करोड़ रुपए और निकालकर बैंकों व आयकर विभाग को देने की इजाजत दे दी है। अब वित्त मंत्रालय की तरफ से नियुक्त कस्टोडियन इस रकम को जारी कर सकेंगे। मंगलवार को विशेष अदालत के न्यायाधीश जस्टिस डी के देशमुख ने फैसला सुनाया कि इस 650 करोड़ रुपए में से 345.76 करोड़ रुपए स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और 259.65औरऔर भी

यूरोप सहित तमाम विकसित देशों में गहराते वित्तीय संकट और घरेलू अर्थव्यवस्था की मंद पड़ती रफ्तार से चिंतित वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को वैश्विक समुदाय का आह्‍वान करते हुए कहा कि हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए और स्थिति से मिलकर निपटना होगा। दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के शोध से जुडी भारतीय परिषद (आईसीआरआईईआर) के एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने अलग से कहा कि लगातार निराशाजनक समाचार मिल रहे हैं। पहले हमें औद्योगिक उत्पादन सूचकांकऔरऔर भी

देश भर में हर साल की तरह इस बार भी 14 सितम्बर को हिं‍दी दि‍वस मनाया जाएगा। इस मौके पर राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील 52 पुरस्कार बांटेंगी। ये पुरस्कार राजभाषा नीति‍ के कार्यान्‍वयन की श्रेणी के अंतर्गत सरकार के मंत्रालयों, वि‍भागों, सार्वजनि‍क उपक्रमों, राष्‍ट्रीयकृत बैंकों और वि‍त्‍तीय संस्‍थानों, स्‍वायत्‍त नि‍कायों, नि‍गमों व बोर्डों को दि‍ए जाएंगे। बता दें कि 14 सितम्बर का महत्वऔरऔर भी

अमेरिकी बाजार कल गिरे तो सही, लेकिन आखिरी 90 मिनट की ट्रेडिंग में फिर सुधर गए। अमेरिकी बाजार में ट्रेड करनेवाले कुछ फंडों का कहना है कि इस गिरावट की वजह यूरो संकट थी, न कि यह शिकायत कि 447 अरब डॉलर का पैकेज रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने के लिए काफी नहीं है। यह पैकेज तो अभी तक महज घोषणा है और इसका असर वास्तविक खर्च के बाद ही महसूस किया जा सकता है। इसऔरऔर भी

सभी लोग कंपनियों के लाभ मार्जिन के कम या ज्यादा होने की बात करते हैं। लेकिन कोई इस बात पर गौर नहीं करता कि देश के अन्नदाता किसानों का लाभ मार्जिन कितना घटता जा रहा है। एक तो वैसे ही 90 फीसदी किसान गुजारे लायक खेती करके जिंदा है, ऊपर से मार्जिन में सुराख ने गरीबी में आटे को और गीला कर दिया है। एक खबर के अनुसार, धान की फसल पर किसानों ने पिछले साल प्रतिऔरऔर भी

जहां सारे कुएं में भांग पड़ी हो, वहां समझदारी की बात करना बेवकूफी है। हमारे शेयर बाजार का यही हाल है। ऑपरेटर, म्यूचुअल फंड और एफआईआई अंदर की खबरों पर काम करते हैं। बाजार इतना छिछला व छिछोरा है कि इनकी खरीद की खबर भी अंदर की खबर बन जाती है। खिलाड़ी लोग इन्हीं खबरों के आधार पर खेल करते हैं। कुछ हैं जो इन्हें कहीं न कहीं फुसफुसा देते हैं। ऐसे लोग गिने-चुने हैं। कुछ हैंऔरऔर भी

अमूमन कुछ लोग लिखते हैं, बहुत से लोग पढ़ते हैं। लेकिन इधर लिखनेवाले बहुत हो गए हैं और पढ़नेवाले कम तो इसका मतलब यही है कि रीतापन इतना ज्यादा है कि अब पढ़नेवाले ही कलम उठाने लगे हैं।और भीऔर भी