देश में भले ही स्विटजरलैड के बैंकों में रखे काले धन को लेकर राजनीतिक माहौल बना दिया गया हो, लेकिन भावना से परे हटकर देखें तो यह रकम बहुत मामूली है। स्विटजरलैंड के केंद्रीय बैंक के मुताबिक उनके देश के बैंकों में रखे गए विदेशी नागरिकों के कुल धन में भारतीयों का हिस्सा महज 0.07 फीसदी है। यह पाकिस्तान से भी कम है। जैसे अपना केंद्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक है, वैसे ही स्विटजरलैंड का केंद्रीय बैंक,औरऔर भी

इस बाजार की बलिहारी है। 10 जून को आईएफसीआई ने सूचित किया कि तीन-तीन एजेंसियों – इक्रा, केयर व ब्रिकवर्क रेटिंग ने उसकी रेटिंग बढ़ा दी है। लेकिन इस अच्छी खबर के ठीक तेरह दिन बाद 23 जून को आईएफसीआई का शेयर 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 42.55 रुपए पर पहुंच गया। महीने भर बाद अब भी उसी के आसपास डोल रहा है। शुक्रवार, 22 जुलाई को एनएसई (कोड – IFCI) में 46.85 रुपए और बीएसई (कोडऔरऔर भी

बड़ी-बड़ी मंजिलों के चक्कर में क्यों पड़ते हैं? अरे! छोटी-छोटी मंजिल बनाएं और वहां तक चलने का मजा लें। बहुत सारे झंझटों और तनावों से मुक्त रहेंगे। साथ ही नई-नई मंजिलें भी फोकट में मिलती रहेंगी।और भीऔर भी

सरकार देशी-विदेशी निवेशकों के मनचाहे सुधारों की राह पर चल पड़ी है। रिलायंस-बीपी के करार को कैबिनेट की मंजूरी और सचिवों की समिति द्वारा मल्टी ब्रांड रिटेल में 49 के बजाय 51 फीसदी विदेशी निवेश (एफडीआई) की सिफारिश यूपीए सरकार के साहसी रुख को दर्शाती है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह विपक्ष के हमले की धार कुंद करने में लगी है। सरकार का यह अंदाज उन चंद बड़े एफआईआई की तरफ से पेश की गई तस्वीर सेऔरऔर भी

वही-वही जुमले। वही-वही बात। बहते पानी में ऐसा हो नहीं सकता! वह तो निर्मल होता है। बास तो हमेशा ठहरे पानी से ही आती है। इसलिए देखें तो सही कि बातों की बास के पीछे आपका ठहराव तो नहीं!और भीऔर भी

इधर बैंक जमकर म्यूचुअल फंडों के लिए सिप (सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) का इंतजाम कर रहे हैं। मार्च 2009 में म्यूचुअल फंडों के सिप खातों की संख्या 18 लाख थी। दो साल में मार्च 2011 तक यह संख्या दो गुने से ज्यादा 42 लाख हो गई। इससे बैंकों को भी अपनी शुल्क-आधारित आय बढ़ाने में मिल रही है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का लक्ष्य मार्च 2012 तक 25 लाख सिप यूनिट बेचने का है। एक्सिस बैंकऔरऔर भी

यूं तो यह जमाना ही अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनने का है। लेकिन यहां मैं अपनी तारीफ नहीं कर रहा। बल्कि, यह बताने की कोशिश कर रहा हूं कि कैसे सहज बुद्धि से अच्छी कंपनियों का चयन किया जा सकता है और उनमें निवेश से फायदा कमाया जा सकता है। केवल दो उदाहरण देना चाहता हूं। एक, पेट्रोनेट एलएनजी का और दूसरा, ईसाब इंडिया का। पेट्रोनेट एलएनजी के बारे में हमने पहली बार चौदह महीने पहले 24औरऔर भी

थोड़ा करो, बाकी होने दो। देखो तो सही कि हम ही नहीं, बहुत-सी लौकिक शक्तियां सक्रिय हैं इस बाह्य जगत में। उनको जान सको तो जानो। नहीं तो उनकी लीला देखो और अचंभित होते रहो।और भीऔर भी

लगातार नकारात्मक माहौल से जूझ रही देश की सबसे बडी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के लिए आखिरकार शुक्रवार को एक अच्छी खबर आ गई। कैबिनेट ने ब्रिटेन की कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम (बीपी) के साथ उसकी साझेदारी को मंजूरी दे दी। इस फैसले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाते हुए आरआईएल का शेयर 1.49 फीसदी बढ़कर 870.60 रुपए पर बंद हुआ। बीपी और रिलायंस के बीच यह करार 720 करोड़ डॉलर का है। इसके तहत बीपी रिलांयस के साथ बनेऔरऔर भी

मंदी का बाजार हमेशा मरे हुए स्टॉक्स में भी जान देता है और तेजी के बाजार से भी ज्यादा तेजी का सबब बन जाता है क्योंकि ऑपरेटर व फंड नहीं जानते कि बाजार का रुख कब पलट जाए तो हमेशा हड़बड़ी में रहते हैं। दूसरी तरफ तेजी का बाजार आपको हमेशा एक धीमा पैटर्न देता है जो अंडमान-निकोबार की यात्रा जैसा बोरिंग होता है क्योंकि यहां निवेशक नोट बनाने की हड़बड़ी में होते हैं, जबकि ऑपरेटरों वऔरऔर भी