पेट्रोल के दाम बढाने के बाद सरकार अब अगले महीने डीजल, रसोई गैस और मिट्टी तेल के दाम में भी संशोधन का फैसला कर सकती है। इस बारे में निर्णय लेने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के अधिकार-प्राप्त समूह की बैठक अगले महीने की नौ तारीख को होगी। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने गुरुवार को दिल्ली में कहा ‘‘प्राधिकृत मंत्री समूह की बैठक 9 जून कोऔरऔर भी

फल, अनाज और प्रोटीन आधारित खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से 14 मई को समाप्त हुए सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 8.55 फीसदी पर पहुंच गई। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि हाल ही में पेट्रोल के दामों में की गई बढ़ोतरी से खाद्य वस्तुओं की कीमतें और बढ़ सकती है। खाद्य मुद्रास्फीति में तेजी के साथ ही विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने से रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अगले महीने मौद्रिक नीति की समीक्षा मेंऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रबंध निदेशक पद के लिए फ्रांस की वित्त मंत्री क्रिस्टिनी लैगार्ड द्वारा दावेदारी पेश किए जाने के बाद भी भारत ने कहा है कि विकासशील देश इस मुद्दे पर अपनी स्थिति मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जहां यूरोप के ज्यादातर देश लैगार्ड की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे हैं, वहीं विकासशील देश अपने बीच बड़े बाजार के रूप में उभर रहे किसी देश से एक नाम पेश करने के लिएऔरऔर भी

सरकार हस्तशिल्प को लोकप्रिय बनाने के लिए टाटा समूह से याचना करने जा रही है। कपड़ा मंत्रालय खुद रतन टाटा को पत्र लिखकर अनुरोध करने जा रहा है कि वे देश भर में फैले वेस्टसाइड स्टोरों में कुछ जगह हस्तशिल्प की वस्तुओं को भी दे दें। बता दें कि वेस्टसाइड टाटा समूह का रिटेल स्टोर है जहां मुख्यतः रेडीमेड कपड़े व लाइफ स्टाइल से जुड़े उत्पाद बेचे जाते हैं। वेस्टसाइड के देश भर में लगभग 50 स्टोरऔरऔर भी

स्पीक एशिया ने इतना झूम-झामकर विज्ञापन नहीं किए होते तो शायद उसके फ्रॉड पर किसी की नजर नहीं जाती क्योंकि हमारे यहां के कानून इतने लचर हैं कि लूटनेवाले आराम से पतली गली से निकलकर जाते हैं। खुद स्पीक एशिया के सीईओ मनोज कुमार का कहना है कि भारत में 4200 मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) कंपनियां सक्रिय हैं जिसकी खास वजह है यहां के कायदे-कानून का कमजोर होना। लचर कानूनों के कारण ही नब्बे के दशक मेंऔरऔर भी

डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट का आखिरी दिन। एक्सायरी का दिन। कल 78,000 करोड़ रुपए का रोलओवर हुआ और इस महीने का ओपन इंटरेस्ट था 76,000 करोड़ रुपए। अब तक किसी भी सेटलमेंट के लिए ये सबसे बुरे आंकड़े हैं। इस 78,000 करोड़ रुपए के रोलओवर में जुलाई के ऑप्शंस ट्रेड की भी काफी रकम शामिल है जो  इन आंकड़ों को और खोखला कर देती है। इन आंकड़ों में बदतर हालात की आहट है। वैसे, यहां से बाजारऔरऔर भी

बिड़ला कॉरपोरेशन को भले ही एम पी बिड़ला समूह की फ्लैगशिप कंपनी कहा जाए। लेकिन हकीकत में वह आर एस लोढ़ा के दिवंगत हो जाने के बाद पूरी तरह उनके बेटों हर्ष व आदित्य लोढ़ा के नियंत्रण में है। माधव प्रसाद बिड़ला ने यह कंपनी 1919 में बनाई थी। उनके मरने के बाद इसका मालिकाना उनकी विधवा प्रियंवदा के हाथ में आ गया है। निःसंतान प्रियंवदा ने वसीयत अपने चार्टर्ड एकाउंटेंट आर एस लोढ़ा के नाम लिखऔरऔर भी

देखने में सफलता कितनी भी व्यक्तिगत लगे, लेकिन मूलतः वह सामाजिक होती है। कोई विचार कितना ही अच्छा क्यों न हो, वह तब तक सफल नहीं होता जब तक उसे सामाजिक तानाबाना नहीं मिलता।और भीऔर भी